नये शिक्षा मंत्री से शिक्षकों को शिक्षाहित की उम्मीदआगामी 23 को जिला आगमन पर शिक्षक उत्साहित दरभंगा. शिक्षाहित में बेहतर उम्मीद को लेकर जिला को नये शिक्षा मंत्री के आगमन का बेसब्री से इंतजार है. आगामी 23 दिसंबर को शिक्षा मंत्री अशोक कुमार चौधरी के दरभंगा कार्यक्रम को लेकर शिक्षक व संगठन अपने-अपने तरीके से स्वागत एवं समस्याओं को लेकर तैयारी में है. अपनी आवाज सीधे विभागीय मंत्री तक पहुंचाने का सुनहरा मौका से चूकना नहीं चाहते. हालांकि उनके कार्यक्रम के दौरान इन्हें कितना मौका मिलेगा, यह तो वक्त बतायेगा, किंतु इनके जिला में आगमन से बहुत उम्मीद संयोये हैं. अभिनंदन की तैयारी : बिहार प्रारंभिक शिक्षक संघ नये शिक्षा मंत्री का अभिनंदन करेगी. प्रदेश उपाध्यक्ष शंभु यादव ने बताया कि इस आशय का निर्णय किया गया है. उनका कहना है कि नियोजित शिक्षकों को बेहतर वेतनमान सेवा शर्त्त की उनसे उममीद है. जिस तरह से पदभार ग्रहण करते उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने का सिलसिला शुरू किया है. ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि प्रारंभिक शिक्षा में गुणवत्ता लाने की जिम्मेवारी नियोजित शिक्षकों की समस्या समाधान में उनका रूख सकारात्मक रहेगा. नियोजन सुनिश्चित कराने की चिंता : टीइटी व एसटीइटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी को अपना नियोजन सुनिश्चित कराने की चिंता है. इन्होंने जब पात्रता परीक्षा पास की थी तो उम्मीद जगी थी कि उन्हें शिक्षक पद मिलेगा, किंतु दो-तीन वर्षों से नियोजन इकाईयों की खाक छा रहे हैं. इस मुद्दे पर उनका संघर्ष जिला से लेकर राज्य तक जारी है. उनकी उम्मीद है कि नये शिक्षामंत्री ऐसी नीति पर काम करेंगे जिससे उनका नियोजन पक्का हो सके. विभिन्न पदों पर प्रोन्नति का लोचा: विभागीय आदेश के बावजूद शिक्षकों को विभिन्न वेतनमान में प्रोन्नति विगत तीन वर्षों से बाधित है. मध्य विद्यालयों में प्रधानाध्यापक, स्नातक कला एवं विज्ञान तथा स्नातक शिक्षक में प्रोन्नति नहीं मिलने से शिक्षकों में आक्रोश है, जबकि इसपर कार्रवाई दिसंबर माह में ही वरीयता के आधार पर करने का निर्देश है. इससे न केवल शिक्षकों को लाभ होगा, बल्कि इन पदों पर प्रोन्नति से जिले में पूर्णकालिक एचएम एवं विषय विशेषज्ञ शिक्षकों का असर गुणवत्ता शिक्षा पर पड़ेगा. भूमिहीन विद्यालयों को छत की उम्मीद : जिले में अभी भी दो सौ से उपर नवसृजित विद्यालय ऐसे हैं, जिन्हें जमीन मयस्सर नहीं है. इनका संचालन पेड़ तले, दलानों पर, सामुदायिक भवन अथवा अन्य विद्यालय में टैग होकर चलाने की मजबूरी है, जिसके कारण उसमें पढ़नेवाले हजारों छात्रों को गुणवत्ताहीन शिक्षा लेने की मजबूरी बनी हुई है. वहीं शहर के दर्जन भर स्कूल को अपना जमीन है. इसपर उम्मीद बनी है कि इसपर मंत्रीजी का ध्यान पड़ने पर इन विद्यालयों को छत नसीब हो सकेगा. भवन निर्माण पर होगा ध्यान : जिले में अभी भी सैंकड़ों विद्यालय हैं, जहां वर्ग कक्ष की कमी है. इसके कारण से संयुक्त वर्ग संचालन की मजबूरी बनी हुई है. वहीं हाइस्कूलों में प्रयोगशाला, लाइब्रेरी आदि की पर्याप्त सुविधा नहीं है. वहीं मध्य विद्यालयों को उच्च विद्यालय तथा उच्च विद्यालय को प्लस टू का दर्जा मिला, किंतु इसके मानक के अनुसार पठन-पाठन की सुविधा नहीं है.
नये शक्षिा मंत्री से शक्षिकों को शक्षिाहित की उम्मीद
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