जिले में 59 साल में गायब हो गयी नदियों की 29 धारायें

पग - पग पोखरि की पहचान वाले जिले में पोखर व नदियां मरती जा रही है

राजकुमार रंजन, दरभंगा

पग – पग पोखरि की पहचान वाले जिले में पोखर व नदियां मरती जा रही है. कई नदियों की मुख्य समेत सहायक धारायें धीरे-धीरे सूखती जा रही है. तालाबों में दरारें पड़ गयी हैं. कई नदियों व तालाबों में धूल उड़ रही है. पानी से लबालब भरे रहने वाले इन तालाबों एवं नदियों की पेटी में बच्चे क्रिकेट व गुल्ली-डंडा खेलते हैं. नदियों के जल ग्रहण क्षेत्र अतिक्रमण के शिकार हो रहे हैं. सरकारी आंकड़े के अनुसार वर्ष 1964 में जिले में बागमती, कमला, कोशी नदियों की 39 सहायक नदी-धारा जीवित थी. इनमें से अब 10 नदी-धारा ही जिंदा है. ये हैं खिरोई, लखनदेई, चकनाहा, जमुने, सिपरीधार, छोटी बागमती, कोला, करेह, बछराजा और जीवछ नदी. नगर में कभी 364 तालाब जीवित अवस्था में था. अब इसकी संख्या घटकर 40 पर आ गयी है. नगर निगम की सूची में ये 40 तालाब जिंदा है. चार दशक पूर्व तक निगम क्षेत्र में कुल 12141 हेक्टेयर रकवा में पोखर व तालाब था. अब यह घटकर 3924 हेक्टर रह गया है. 1955 की गजट के अनुसार जिले में 1623 सरकारी व 2301 निजी तालाब थे. सेवानिवृत्त सरकारी अमीन भगवान ठाकुर के अनुसार 1975 के बाद से शहर में तालाबों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है. जहां कभी लबालब पानी से भरा जल ग्रहण क्षेत्र था, जमीन मापी के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था, अब उन अधिकांश जगहों पर बहुमंजिला इमारत बन चुका है. सेवानिवृत्त अमीन मुस्लिम बताते हैं कि जमीन खरीद बिक्री का प्रचलन बढ़ गया है. भू माफिया की नजर इन दिनों ताल तलैया पर अधिक ही है. जिनके पूर्वज ताल तलैया का निर्माण कराए थे, उनके वंशज स्वयं भी उसपर मकान बना रहे तथा दूसरे के हाथ बेच भी रहे. यही कारण है कि जल ग्रहण क्षेत्र लगातार सिकुड़ता जा रहा है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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