दरभंगा (कमतौल) :बिहारके दरभंगा में आठवें राजकीय अहिल्या-गौतम महोत्सव का समापन भले ही शांतिपूर्ण संपन्न हो गया. परंतु पहले दिन से ही व्यवस्था में फेर बदल होते रहने और तीसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम में मची अफरातफरी से, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होनी चाहिए कि उक्त कार्यक्रम का आयोजन इस ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के धार्मिक स्थल पर उचित नहीं था.
अहिल्या स्थान के छोटे से मैदान में भोजपुरी कार्यक्रम का आयोजन, कार्यक्रम में जुटने वाली अप्रत्याशित भीड़ के कंट्रोल की व्यवस्था किये बिना, कार्यक्रम का आयोजन का निर्णय किसी हादसे को आमंत्रण देने से कम नहीं था. तीसरे दिन कार्यक्रम में अशिक्षित, फुहड़ और अश्लील मानसिकता वाले लोगों की भीड़ ज्यादा थी. संयोग अच्छा रहा कि अहल्या-गौतम की पवित्र भूमि पर किसी तरह की कोई अनहोनी घटना घटित नहीं हुई, लेकिन ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से किसी तरह की अनहोनी घटना घटित होने से इंकार नहीं किया जा सकता.
राजकीय अहिल्या-गौतम महोत्सव के सफल आयोजन में जिला प्रशासन की अहम भूमिका होनी चाहिए थी, जो कहीं नजर नहीं आयी. एक तो पूर्व में आयोजित कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने कोई वरीय अधिकारी अहिल्यास्थान नहीं आये, वहीं पहले दिन जिलाधिकारी पर्यटन मंत्री के साथ आये और उन्हीं के साथ चले गये. इसके अलावे दूसरे और तीसरे दिन के आयोजन में कोई झांकने तक नहीं आया.
जिला से दर्जनों की संख्या में अतिरिक्त पुलिस फोर्स और त्वरित कार्य बल (रैफ) को भेजा गया, सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था की गयी, परंतु जुटने वाली अप्रत्याशित भीड़ का कंट्रोल कैसे होगा, आपात स्थिति में इससे कैसे निबटा जायेगा, इसकी कोई व्यवस्था नजर नहीं आयी. लोग कहते हैं कि इस तरह के बड़े कार्यक्रमों का आयोजन होना तो चाहिए, परंतु इसकी पूर्व तैयारी भी होनी चाहिए. उचित और अपर्याप्त संसाधन के बलबूते बड़े आयोजन करना खतरे से खाली नहीं होगा.
लोकार्पण के लिए छपी स्मारिका का नहीं हो सका विमोचन
आठवें राजकीय अहिल्या-गौतम महोत्सव में लोकार्पण के लिए छपी स्मारिका का विमोचन नहीं हो सका. तीसरे दिन होने वाले भोजपुरी कार्यक्रम को देखने उमड़ी भीड़ के चलते माहौल अनुकूल नहीं था. संभवतः आयोजकों ने इसका विमोचन करना मुनासिब नहीं समझा. स्मारिका के प्रधान संपादक हीरालाल सहनी ने बताया कि एक तो स्मारिका छप कर कार्यक्रम स्थल पर देर से पहुंची. लेकिन, माहौल को देखकर इसका मंच से विमोचन नहीं हो सका. उन्होंने कहा कि पूर्व में 500 प्रति छपती थी, इस बार 300 सौ प्रति छपवायी गयी थी. लेकिन, छपने के बावजूद विमोचन नहीं हो सका. इसका खेद है.
धार्मिक न्यास समिति के प्रांगण प्रभारी ने कहा…
अहिल्यास्थान धार्मिक न्यास समिति के प्रांगण प्रभारी सह अहियारी उत्तरी के पूर्व मुखिया दीपक कुमार ठाकुर ने कहा कि यह धार्मिक महोत्सव है. यहां जुटने वाली अनियंत्रित भीड़ फुहड़ मानसिकता और उन्मादी प्रवृति की ज्यादा थी. आध्यात्मिक स्थल पर ग्रामीण माहौल में इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन नहीं होना चाहिए था. भगवान का लाख-लाख शुक्र रहा कि कोई अनहोनी घटना नहीं हुई. प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन सफल रहा, लेकिन यहां इस तरह के कार्यक्रम होने से किसी अनहोनी घटना घटित होने से इंकार नहीं किया जा सकता. अनियंत्रित भीड़ की वजह से सिर्फ कुर्सियां ही नहीं टूटी, कई ऐसी घटनाएं हुई, जिसका उल्लेख नहीं किया जा सकता.
इतनी भीड़ जुटने का नहीं था अनुमान : हीरालाल साहनी
राष्ट्रभाषा हिंदी विकास परिषद सह वरिष्ठ नागरिक संघ दरभंगा के उपाध्यक्ष हीरालाल सहनी ने माना कि अहिल्यास्थान में इतनी भीड़ जुटेगी, इसका अनुमान प्रशासन को नहीं रहा होगा. भोजपुरी कलाकार के नाम पर जो भीड़ जुटी, वह फुहड़ मानसिकता लेकर आयी थी. मनसूबे सफल नहीं होने से उनलोगों ने बार-बार अफरातफरी की स्थिति पैदा किया. वहीं न्यास समिति और जिला प्रशासन दोनों एक होकर भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था करती, तो भीड़ नियंत्रित हो सकता था. ग्रामीण वातावरण इस तरह के कार्यक्रम आयोजित नहीं होना चाहिए. इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन हो तो गांव से दूर उसके लिए जगह की व्यवस्था हो, इस ओर सरकार, जिला प्रशासन और न्यास समिति को ध्यान देना होगा.
कार्यक्रम की गुणवत्ता संदिग्ध रही : न्याय समिति के अध्यक्ष
स्थानीय धार्मिक न्यास समिति के अध्यक्ष डॉ. कवीश्वर ठाकुर ने कहा कि अबतक हुए सारे कार्यक्रमों में जुटी भीड़ का भले ही रेकॉर्ड टूटा हो, लेकिन धार्मिक और पौराणिक महत्व के तीर्थ स्थल अहिल्यास्थान के संदर्भ में यह कार्यक्रम की गुणवत्ता संदिग्ध रही. अहिल्या-गौतम की कृपा से किसी तरह की कोई अनहोनी घटना घटित नहीं हुई, लेकिन अनहोनी घटना हो सकती थी, इससे इंकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में भाव व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह का कोई कार्यक्रम आयोजित होता है, तो पूरी तैयारी के साथ हो. इसके लिए स्थान और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था हो सरकार और जिला प्रशासन के स्तर से हो.
