रोजगार की तलाश. अपनों संग त्योहारों की खुशी बांटने का छोड़ा अवसर
दरभंगा : धान कटनी का समय शुरू होते ही एक बार फिर से मजदूरों का पलायन आरंभ हो गया है. इस इलाके से नित्य हजारों की संख्या में मजदूर दूसरे प्रदेशों के लिए पलायन कर रहे हैं. अपने घर पर काम नहीं मिलने तथा दूसरे राज्यों में यहां के अनुपात में अधिक मजदूरी मिलने के कारण मजदूरों का रोज पलायन हो रहा है. बच्चों के पालन-पोषण के लिए त्योहार के इस मौसम में अपनों से दूर जा रहे हैं. इसे लेकर इन दिनों में दरभंगा जंक्शन पर यात्रियों की भीड़ काफी बढ़ गई है. मुख्य रूप से जननायक एक्सप्रेस में खचाखच भरकर मजदूर तबके के यात्री सफर कर रहे हैं. वैसे अन्य ट्रेनों से भी बड़ी संख्या में इस तबके के यात्री रवाना हो रहे हैं.
बाढ़ से काम मिलने की उम्मीद भी समाप्त : पलायन की मुख्य वजह यहां मजदूरों को काम नहीं मिलना है. वैसे इस साल बाढ़ ने भी बुरी तरह से झकझोर कर रख दिया है. खेती चौपट हो गयी है तो खेतों में काम मिलने के आसार भी समाप्त हो गये हैं. पूरा क्षेत्र बाढ़ की त्रासदी से त्रस्त है, लिहाजा अन्य काम भी ठप पड़े हैं. मजदूरी कर जीवन-यापन करनेवालों को काम नहीं मिल रहा. ऐसे में दो जून की रोटी का जुगाड़ कर पाना भी मुश्किल हो रहा है. इसलिए पलायन करना इनकी मजबूरी बन गयी है.
एक दिन पूर्व से ही डाल देते डेरा
भीड़ का आलम यह है कि एक दिन पूर्व से ही ट्रेन पकड़ने के लिए यात्रियों को की भीड़ जंकशन पर जुट जाती है. प्लेटफॉर्म, बाहरी परिसर के अतिरिक्त यार्ड तक यात्रियों की भीड़ से पटा नजर आ रहा है. टैक्सी व साइकिल स्टैंड में भी भीड़ जमा है. सुबह में अमृतसर से आने के साथ ही ट्रेन में जगह के लिए यात्री इसमें सवार हो जाते हैं. धुलाई के लिए ट्रेन को खाली कराने में आरपीएफ को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.
बाढ़ग्रस्त इलाके से सर्वाधिक पलायन :
ग्रामीण क्षेत्र के मजदूर तबके के यात्री पलायन कर रहे हैं. इसमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के मजदूरों की संख्या सर्वाधिक है. जिला के कुशेश्वरस्थान, कुशेश्वरस्थान पूर्वी, बिरौल, गौराबौराम, बेनीपुर, जाले आदि क्षेत्र के अधिकांश यात्री रहते हैं. इस में सबसे अधिक संख्या कुशेश्वरस्थान तथा कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के यात्रियों की है. दरभंगा जंकशन पर इस जिला के अलावा सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल आदि जिलों से सभी यात्री ट्रेन पकड़ने पहुंच रहे हैं. लिहाजा भीड़ और अधिक बढ़ गयी है.
दरभंगा व जयनगर स्टेशन के यार्ड में ही फुल हो जा रहीं ट्रेनें : दोनों ही स्टेशनों के यार्ड में ही ट्रेनें फुल हो जा रही हैं. इसे लेकर सीट सेलरों की चांदी कट रही है. जयनगर से शहीद, सरयू यमुना एक्सप्रेस तो दरभंगा से जननायक एक्सप्रेस से ज्यादातर मजदूर धान कटनी के लिए पलायन कर रहे हैं.
सहरसा स्टेशन पर पांच हजार से अधिक मजदूर डाल रखे हैं डेरा: दशहरा के बाद से सहरसा स्टेशन मजदूरों से भड़ा हुआ रह रहा है. यहां पांच हजार से भी अधिक मजदूर प्रतिदिन डेरा डाले हुए हैं. भीड़ कम करने के लिए दो स्पेशल ट्रेनें अंबाला के लिए चलायी जा चुकी है, लेकिन मजदूरों का पलायन थमने का नाम नहीं ले रहा. मंगलवार की सुबह सहरसा स्टेशन पर हजारों की संख्या में
मजदूर धान कटनी में जाने के लिए पहुंच गये थे. सुबह अमृतसर जाने वाली जनसेवा एक्सप्रेस 10 घंटे बाद के लिये रिशिड्यूट कर दी गयी थी.
देर
शाम उक्त ट्रेन रवाना हुई. यह ट्रेन अमृतसर से चलकर 16 घंटे
सहरसा पहुंची थी. मंगलवार को रेक के अभाव में ट्रेन को रिशिड्यूल करना पड़ा.
खास बातें
मनरेगा के तहत नहीं मिल रहा काम
नित्य हजारों की संख्या में पलायन कर रहे लोग
यात्रियों की भीड़ से पटा पूरा दरभंगा जंक्शन
पंजाब व हरियाणा के लिए सर्वाधिक पलायन
पंजाब तथा हरियाणा में धान की रोपनी इस क्षेत्र के लिहाज से पहले होती है. स्वाभाविक रूप से कटनी भी पहले शुरू हो जाती है. वहां मजदूरों की बढ़ी मांग को देखते हुए यहां से हजारों की तादाद में मजदूर पलायन कर रहे हैं. इन दिनों इस तबके के यात्रियों की संख्या में करीब तीन गुना वृद्धि हो गई है.
आमतौर पर प्रतिदिन दो हजार यात्री यहां से रवाना होते हैं. यह संख्या इन दिनों बढ़कर सात हजार के करीब पहुंच गई है. भेड़-बकरियों की तरह ट्रेन में ढूंसकर यात्री जा रहे हैं.
तीन दिनों में 22 हजार टिकट की हुई बिक्री
पिछले एक सप्ताह से भीड़ में वृद्धि शुरू हुई है. पिछले तीन दिनों में इसमें काफी इजाफा हो गया है. तकरीबन दो हजार यात्री क्षमता वाली जननायक ट्रेन में लगभग छह हजार यात्री सवार रहते हैं. वैसे अमृतसर जानेवाली शहीद, सरयू यमुना एक्सप्रेस के साथ ही दिल्ली जानेवाली गाड़ियों में भी इस तबके के यात्रियों की भीड़ रहती है. पिछले तीन दिनों में इस तबके के लगभग 22 हजार यात्रियों ने टिकट खरीदा.
आय में " तीन लाख का इजाफा
इससे रेलवे के राजस्व में भी इजाफा हुआ है. वैसे समेकित रूप से रेलवे की आय में कोई खास वृद्धि दर्ज नहीं की गयी है. कारण इन दिनों जावक से अधिक आवक ट्रेनों में ही भीड़ रहती है. त्योहार पर घर वापस आनेवालों की संख्या अधिक है. इस अनुपात में बाहर जानेवाले काफी कम हैं. बावजूद मजदूरों के पलायन की आयी बाढ़ ने विभाग के राजस्व में इजाफा जरूर कर दिया है. रेल सूत्रों के अनुसार आय में करीब तीन लाख रुपये दैनिक वृद्धि दर्ज की गयी है.
यहां तो दो जून की रोटी का भी नहीं हो पाता जुगाड़
ट्रेन के इंतजार में जंकशन पर बैठे कुशेश्वरस्थान के चिगड़ा गांव निवासी परमेश्वर सदा ने कहा कि बाढ़ के कारण सब कुछ बर्बाद हो गया. दो जून की रोटी का जुगाड़ भी नहीं हो पा रहा है. मनरेगा के तहत कार्ड बना हुआ है, लेकिन काम नहीं मिल रहा. पंजाब जा रहे हैं. वहां एक से दो महीना में कम से कम 20 से 30 हजार कमा कर लौट आयेंगे. उनके साथ दो दर्जन मजदूरों की टोली है. वहीं सीतामढ़ी बाजपट्टी से हरियाणा जाने के लिए दरभंगा जंक्शन पहुंचे राम अवतार मंडल बताते हैं कि मनरेगा के भरोसे रहे तो बच्चों के साथ खुद भी भूखों मर जायेंगे. कहीं कुछ काम मिल ही नहीं रहा.
समस्तीपुर रेल मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सह जनसंपर्क पदाधिकारी वीरेंद्र कुमार कहते हैं कि मजदूरों का पलायन मौसमी है. भीड़ में इजाफा हुआ है. स्पेशल ट्रेन चलाने की योजना की समीक्षा की जा रही है. आवश्यकता के अनुसार विशेष गाड़ी के लिए प्रस्ताव मुख्यालय में भेजा जायेगा. यात्रियों को किसी तरह की समस्या नहीं होने दी जायेगी.
