दरभंगा : इमरजेंसी वार्ड में घंटों बंधक बनाये जाने के विरुद्ध डीएमसीएच अधीक्षक ने 50-60 जूनियर डॉक्टरों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी है. कहा है कि जेडीए के हड़ताल के दौरान वह सुबह करीब 10 बजे डीएमसीएच पहुंचे. उसी समय जानकारी मिली कि इमरजेंसी चौक पर मरीज के परिजन हंगामा कर रहे हैं.
ब्लड बैंक रेफ्रीजरेटर का टेंपरेचर देख खोली व्यवस्था की पोल : ब्लड बैंक रेफ्रीजरेटर का टेम्परेचर दो से आठ के बीच होना चाहिए. इससे ज्यादा टेम्परेचर होने से उस रेफ्रीजेरेटर में रखे ब्लड का गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है. जूनियर डॉक्टर जब रेफ्रीजेरेटर की पड़ताल की तो दो में से एक रेफ्रीजरेटर का टेम्परेचर 11.5 बता रहा था. वहीं वेट मशीन वर्षों से खराब होने की बाता कही गयी. इस पर जब जूनियर डॉक्टरों ने प्रभारी डॉ चौरसिया से सवाल किया तो उनकी बोलती बंद हो गयी. झेंपते हुये कहा कि इसके लिये उन्होंने दो दर्जन से अधिक बार अधीक्षक से पत्राचार कर चुके हैं.
अब जाकर रेफ्रीजेरिटर खरीदने का आर्डर मिला है. हालांकि प्रभारी डॉ चौरसिया ने यह बात भी जूनियर डॉक्टरों के आक्रोश को टालने के लिये ही कह दिया. सच्चाई यह है कि ब्लड बैंक प्रभारी पुराने हो चुके ब्लड बैंक रेफ्रीजेरेटर के लिये अधीक्षक को दो दर्जन से अधिक बार जरूर पत्राचार किये. अधीक्षक ने भी इसके लिये स्वास्थ्य विभाग से पत्राचार कर चुके हैं लेकिन, अबतक कोई फलाफल नहीं निकल सका है.
ब्लड बैंक रेफ्रीजरेटर का टेंपरेचर देख खोली व्यवस्था की पोल : ब्लड बैंक रेफ्रीजरेटर का टेम्परेचर दो से आठ के बीच होना चाहिए. इससे ज्यादा टेम्परेचर होने से उस रेफ्रीजेरेटर में रखे ब्लड का गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है. जूनियर डॉक्टर जब रेफ्रीजेरेटर की पड़ताल की तो दो में से एक रेफ्रीजरेटर का टेम्परेचर 11.5 बता रहा था. वहीं वेट मशीन वर्षों से खराब होने की बाता कही गयी. इस पर जब जूनियर डॉक्टरों ने प्रभारी डॉ चौरसिया से सवाल किया तो उनकी बोलती बंद हो गयी. झेंपते हुये कहा कि इसके लिये उन्होंने दो दर्जन से अधिक बार अधीक्षक से पत्राचार कर चुके हैं.
अब जाकर रेफ्रीजेरिटर खरीदने का आर्डर मिला है. हालांकि प्रभारी डॉ चौरसिया ने यह बात भी जूनियर डॉक्टरों के आक्रोश को टालने के लिये ही कह दिया. सच्चाई यह है कि ब्लड बैंक प्रभारी पुराने हो चुके ब्लड बैंक रेफ्रीजेरेटर के लिये अधीक्षक को दो दर्जन से अधिक बार जरूर पत्राचार किये. अधीक्षक ने भी इसके लिये स्वास्थ्य विभाग से पत्राचार कर चुके हैं लेकिन, अबतक कोई फलाफल नहीं निकल सका है.
