दरभंगा : भाद्र शुक्ल चतुर्दशी पर जिला में जगह-जगह भगवान अनंत की पूजा अर्चना की गई. भक्तिभाव से श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु के प्रतिरूप भगवान अनंत का पूजन किया. इस अवसर पर जहां श्रद्धालुओं ने अपने घर पर अनुष्ठान का आयोजन किया, वहीं मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई. इसमें आसपास के श्रद्धालु शामिल हुए. श्यामा मंदिर परिसर, संकट मोचन धाम समेत सैकड़ों स्थल पर पूजन का आयोजन किया गया. परंपरागत तरीके से श्रद्धा के साथ भक्तों ने नये अनंत धारण किए.
क्षीर सागर के मंथन से मिले भगवान अनंत
दरभंगा : भाद्र शुक्ल चतुर्दशी पर जिला में जगह-जगह भगवान अनंत की पूजा अर्चना की गई. भक्तिभाव से श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु के प्रतिरूप भगवान अनंत का पूजन किया. इस अवसर पर जहां श्रद्धालुओं ने अपने घर पर अनुष्ठान का आयोजन किया, वहीं मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई. इसमें आसपास के श्रद्धालु शामिल हुए. […]

सर्वप्रथम पुराने अनंत की पूजा की गई इसके पश्चात नये अनंत का पूजन हुआ. गाय के दूध आदि से तैयार क्षीरसागर का मंथन किया गया. इस मंथन में भगवान अनंत प्राप्त हुए. इस पूजन में मिथिला क्षेत्र में प्रचलित बीज मंत्र- की मथै छी, क्षीर सागर. किनका तकै छी, भगवान अनंत के. भेटला, हां भेटला, से पूजन किया गया. मौके पर भगवान अनंत की महिमा का बखान करने वाले कथा का भक्ति भाव से श्रद्धालुओं ने श्रवण किया. अंत में आरती के पश्चात पूजन संपन्न हुआ.
श्रद्धालु मिथिलावासी अनंत चतुर्दशी के दिन नये अनंत धारण करते हैं. पूरे वर्ष भर इस अनंत को पुरुष जहां अपने दाहिने बांह में बांधकर रखते हैं, वहीं महिलाएं बाई बांह पर अनंत बांधकर अपनी श्रद्धा प्रदर्शित करती है. मान्यता है कि अनंत बांधने वाले भक्तों का कभी भी भगवान अनंत अनिष्ट नहीं होने देते. उनकी सभी मनोकामना को पूर्ण करते हैं. भक्तों ने नये अनंत धारण करने के बाद ही मंगलवार को प्रसाद ग्रहण करने के पश्चात भोजन किया. इसे लेकर वातावरण भक्ति में बना रहा यह बता दें कि जो श्रद्धालु सालभर अनंत नहीं रख पाते वह भी एक निश्चित अवधि तक अनंत धारण करते हैं. इसके पश्चात विसर्जन कर देते हैं.