निगम के पास चलंत शौचालय नहीं
दरभंगा : अचानक आई बाढ़ विभिन्न समस्याओं के साथ सौगात के रूप में गंदगी भी परोस रही है. बाढ़ की वजह से विस्थापित सैकड़ों परिवार के हजारों सदस्य संसाधन के अभाव में शहरी क्षेत्र को गंदा कर रहे हैं. यह समस्या ना हो इसके लिए नगर निगम प्रशासन के पास कोई व्यवस्था नहीं है. बाढ़ […]
दरभंगा : अचानक आई बाढ़ विभिन्न समस्याओं के साथ सौगात के रूप में गंदगी भी परोस रही है. बाढ़ की वजह से विस्थापित सैकड़ों परिवार के हजारों सदस्य संसाधन के अभाव में शहरी क्षेत्र को गंदा कर रहे हैं. यह समस्या ना हो इसके लिए नगर निगम प्रशासन के पास कोई व्यवस्था नहीं है. बाढ़ पीड़ित भी मजबूर हैं. लोक-लाज को त्यागकर खुले में शौच के लिए विवश हैं. गत 16 अगस्त की रात से बागमती नदी का पानी शहर के मुहल्लों में फैलने लगा.
17 अगस्त को बाढ़ में उग्र रूप धारण कर लिया. पूर्वी हिस्से में भी इसका पानी प्रवेश करने लगा. लिहाजा करीब तीन दर्जन मुहल्ले जलमग्न हो गए. सैकड़ों परिवार विस्थापित हो गए. करीब एक पखवारा गुजर जाने के बाद भी जगह-जगह बाढ़ पीड़ितों ने शरण ले रखा है. राज परिसर, फोरलेन एनएच 57 के अतिरिक्त विभिन्न सरकारी भवनों में हजारों लोग शरणार्थी की जिंदगी जी रहे हैं.
शौच की समस्या सबसे जटिल : यूं तो बाढ़ पीड़ितों के लिए समस्याओं का पहाड़ खड़ा है. भोजन से लेकर पेयजल तक का संकट है, लेकिन सबसे जटिल समस्या शौचालय की है. शौचालय का प्रबंध नहीं होने के कारण बाढ़ पीड़ितों को खुले में शौच करना पड़ रहा है. यह सिलसिला गत दो सप्ताह से चल रहा है. नगर निगम प्रशासन के पास दशकों बीत जाने के बाद भी एक अदद चलंत शौचालय तक आमजन को उपलब्ध कराने के लिए नहीं है. किसी झाड़ी के पीछे, सड़क किनारे या फिर ऊंचे स्थल पर लोक-लाज को त्यागकर बाढ़ पीड़ित शौच कर रहे हैं. जाहिर तौर पर शहर गंदगी से पटा जा रहा है.
इन मोहल्लों में परेशानी अधिक : इधर सबसे अधिक परेशानी बागमती नदी के पश्चिमी भाग में डूबे मोहल्लों के बाढ़ पीड़ितों की है. अभी भी जगह-जगह तीन से चार फीट पानी जमा है. शौच जाने के लिए लोगों को सूखी जमीन नहीं मिल रही. बाढ़ पीड़ित बताते हैं कि उन्हें पानी तैर कर लंबी दूरी तय करने पड़ते हैं. इसमें बाजितपुर, शुभंकरपुर, रत्नोपट्टी, कबराघाट, महदौली, बिचला टोल, सतिहारा टोल, नागेश्वरटोला, कुम्हरटोली, बख्तौरगंज, हरिजन कॉलोनी सहित करीब दर्जनभर मुहल्ले शामिल हैं.
ओडीएफ के प्रति भी विभाग लापरवाह
एक तरफ केंद्र की सरकार ने पूरे देश को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए अभियान छेड़ रखी है. शौचालय निर्माण तथा उसके उपयोग को लेकर अरबों रुपए खर्च कर रही है, दूसरी ओर संसाधन के अभाव में लोग खुले में शौच कर रहे हैं. ज्ञातव्य हो कि बाढ़ आने से पूर्व नगर निगम की ओर से चलंत शौचालय के लिए सर्वे का कार्य शुरू किया गया. बाढ़ आ जाने की वजह से यह कार्य फिलहाल रुका हुआ है. शौचालय निर्माण के प्रति भी नगर निगम प्रशासन पूरी तरह से गंभीर नहीं है. यही वजह है कि एक साल से अधिक गुजर जाने के बावजूद आज तक निगम क्षेत्र के 48 में से एक भी वार्ड खुले में शौच से मुक्त घोषित नहीं हो सका है. प्राकृतिक आपदा के रुप में आई बाढ़ ने नगर निगम की लापरवाही को उजागर कर दिया है देखना है इससे निगम कितनी सीख लेता है.