सदर : रानीपुर पंचायत के लालूनगर पांच दिनों से बाढ़ के पानी से घिरा है. टोलेवासी अपना घरबार खाली कर ऊंचे स्थानों पर चले गये हैं. कुछ एनएच 105 के दिल्ली मोड़ के निकट पुल के पास तो कुछ बगल के नये बस स्टैंड परिसर में समय काट रहे हैं. पुल पर रहनेवाले पीड़ित परिवार भीड़ वाली सड़क के किनारे जान जोखिम में डालकर जीवन जी रहे हैं. इस सड़क पर वाहनों का हमेशा दवाब रहता है.
मदद के इंतजार में पथरा गयीं गांगो की आंखें
सदर : रानीपुर पंचायत के लालूनगर पांच दिनों से बाढ़ के पानी से घिरा है. टोलेवासी अपना घरबार खाली कर ऊंचे स्थानों पर चले गये हैं. कुछ एनएच 105 के दिल्ली मोड़ के निकट पुल के पास तो कुछ बगल के नये बस स्टैंड परिसर में समय काट रहे हैं. पुल पर रहनेवाले पीड़ित परिवार […]

यहां रह रही गांगो देवी घर में पानी घुसने पर अपना सामान भी नहीं निकाल पायी.
बेटा बाहर रहता है. गांव से विस्थापित होकर सड़क पर आये पांच दिन बीत चुके हैं. मदद की आस में आंखें पथरा गयी हैं. अपने सामने पेट काटकर जुगाड़ किए गये सामान को बर्बाद होते बसा आंसूभरी नजरों से देखती रही. अब तो इन आंखों के आंसू भी लगता है सूख गये हैं. गांगो देवी कहती है कि इतने दिन बीतने के बाद भी अभी तक कोई खोज-खबर लेने नहीं आया है. दाना पानी भी नहीं मिलता है. घर में रखा अनाज डूब गया. बेटा अभी तक नहीं आया है. यहीं एक दूसरी पीड़िता फुलिया देवी है.
उम्र काफी अधिक है. वह आंख से देख भी नहीं पाती है. दिन-रात सड़क किनारे पड़ी रहती है. उसे तो सड़क पर कैसे क्या चल रहा है पता नहीं लगता, लेकिन किसी की आवाज सुनकर वह चौंक उठती है. उसे लगता है कि खाना खिलाने के लिये या कुछ देने के लिये कोई फरिस्ता बनकर जरुर आया है. हर बार उसकी यह उम्मीद निराशा में बदल जाती है.
फुलिया बताती है कि बाढ़ से बच गये, लेकिन लगता है अब भूख से दम निकल जायेगा. अब तो भगवान उठा ले, इसी में कल्याण है. इसी तरह वहां की बुधिया देवी, रामफल दास आदि ने कहा कि इतने दिनों बाद भी अभीतक प्रशासन खोज तक करने नहीं पहुंचा है. सभी सरकार एवं प्रशासन के अधिकारियों कोष रहे हैं. वहीं मुखिया राजकुमार दास अपने साथियों के साथ पंतायत के वार्डों का भ्रमण कर पीड़ितों का हाल जानने एवं हर संभव सहायता देने की कोशिश में जुटे हैं.