खुलासा . एसएसपी ने बताया, किसी ने सिम्मी के परिजनों को बरगलाया
दरभंगा : बहादुरपुर थाना क्षेत्र के वाटरवेज कॉलोनी निवासी व बैडमिंटन खिलाड़ी सिम्मी सलोनी मौत मामले में फंसने के डर से परिजन पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया गया. इसका खुलासा करते हुये एसएसपी सत्य वीर सिंह ने बताया कि कमर दर्द के कारण बैडमिंटन खिलाड़ी सिम्मी महीनों से डिप्रेशन में थी. इसी दौरान 21 जुलाई को बड़ी बहन से टीवी देखने के कारण झगड़ा और मारपीट हो गई. यही कारण बना कि उसने 22 जुलाई की सुबह घर से निकलकर पानी टंकी पर चढ़कर छलांग लगा ली. घटना के दिन से ही परिजन इस पर परदा डालने में लगे थे. लेकिन अनुसंधान में कहीं से हत्या का साक्ष्य नहीं मिल रहा था.
परिजनों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि घर में टीवी देखने के कारण बहनों के बीच झगड़ा और मारपीट भी हुआ था. इसको लेकर परिजनों का कई बार विरोधाभास बयान भी आया. सारे साक्ष्य भी चीख-चीखकर सिम्मी के आत्महत्या की गवाही दे रहा था. कड़ी पूछताछ के बाद परिजनों ने इसकी पुष्टि की.
ब्लाइंड केस को सुलझाने में पुलिस ने दिखाया धैर्य : सिम्मी सलोनी ब्लाईंड हत्याकांड मामले में भारी दवाब के बीच पुलिस ने धैर्य का परिचय दिया है. हाई प्रोफाइल कांड के बाद सामाजिक, राजनीतिक और पुलिस मुख्यालय के दवाब के बाद भी पुलिस ने कोई जल्दबाजी नहीं दिखायी और न ही बेवजह किसी को परेशान ही किया गया है. बता दें कि सिम्मी का पानी टंकी परिसर में लाश मिलने के बाद सबसे पहले ऑपरेटर अरुण कुमार की तलाश की गई. बताया गया कि अरुण सिम्मी की मौत के दो दिन पहले से ही गायब है. पुलिस बड़े ही धैर्य से ऑपरेटर अरूण की तलाश की.
अरूण के सामने आने के बाद पता चला कि वह 18 जुलाई से ही अवकाश पर बाहर गया हुआ था. इसके बाद पिछले एक महीने से सिम्मी के साथ छेड़खानी का मामला सामने आया. इस मामले में डरहार का रहनेवाला राजा का नाम आया. पुलिस उससे भी पूछताछ की. वहीं सिम्मी के बड़े भाई मोलू से कुछ युवकों की पुरानी दुश्मनी की बात सामने आयी. पुलिस सभी से गहन पूछताछ की. पूछताछ के बाद आश्वस्त होने पर पुलिस ने किसी को परेशान नहीं की.
वहीं यह बात भी सामने आयी कि घटना से एक दिन पहले 21 जुलाई को सिम्मी की अपनी बड़ी बहन रिम्मी सलोनी के साथ टीवी देखने को लेकर झगड़ा हुआ था. पुलिस ने इसको लेकर भी परिजनों से गहन पूछताछ की. पूछताछ का पुलिस ने वीडीयो रिकार्डिंग भी कराया. लेकिन किसी को बेवजह सलाखों के पीछे नहीं ढकेला.
आम तौर पर देखा जाता है कि इस तरह के हाई प्रोफाइल मामले में पुलिस जल्दबाजी में मामले को दबाने के लिये महज शक के आधार पर कुछ लोगों को जेल भेज देती है. इस धैर्य का सबसे बड़ा कारण डीआईजी बिनोद कुमार और एसएसपी सत्य वीर सिंह द्वारा लगातार मामले पर नजर रखना और प्रतिदिन इसका समीक्षा करना बताया जाता है.
जिस प्रकार सिम्मी की मौत के बाद धरना-प्रदर्शन का दौड़ चला पुलिस अगर समझदारी से काम नहीं ली होती तो कई निर्दोश अबतक सलाखों के पीछे होते.
22 जुलाई को पानी टंकी परिसर में मिली थी सिम्मी सलोनी का लाश
डिप्रेशन व बहन से झगड़ा को बरदाश्त नहीं कर पायी बैडमिंटन खिलाड़ी
भाई के आवेदन पर दर्ज हुई थी हत्या की प्राथमिकी
फंसने के डर से पुलिस को परिजनों
ने किया गुमराह
परिजनों से पूछताछ के बाद
निष्कर्ष पर पहुंची पुलिस
बुधवार को एसएसपी के निर्देश पर एएसपी दिलनवाज अहमद ने सिम्मी की बहन रिम्मी, भाई गोलू व मोलू, पिता अजय कुमार सिन्हा से लंबी पूछताछ की. पूछताछ में सही बात सामने आ गया. इसके बाद एसएसपी सत्य वीर सिंह स्वयं सिम्मी के पिता अजय कुमार सिन्हा को अपने कार्यालय कक्ष में बुलाकर लंबी पूछताछ की. पूछताछ के बाद साफ हो गया कि सिम्मी की हत्या नहीं हुई. उसने आत्महत्या कर ली. हालांकि आत्महत्या के लिये प्रेरित करने को लेकर सिम्मी की बड़ी बहन रिम्मी को गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस को दिया गया
विरोधाभास बयान
सिम्मी की लाश मिलने के बाद परिजनों ने पुलिस को हत्या की आशंका जतायी. उस दिन पुलिस को नहीं बताया गया कि घर में उसका किसी से झगड़ा हुआ था. शुरू-शुरू में एसएसपी को भी लगा कि सिम्मी की हत्या की गई है. लेकिन विभिन्न बिंदुओं पर छानबीन के बाद कहीं से हत्या का सुराग नहीं मिला. इसके बाद परिजनों से फिर से पूछताछ की गई. परिजनों का क्रॉस इंटोग्रेशन किया गया. क्रॉस इंटोग्रेशन में परिजनों का बयान विरोधाभास साबित हुआ. इसके बाद पुलिस फूंक-फूंककर कदम उठाना शुरू की. परिजनों के बयान का विडियोग्राफी कराया गया. पता चला कि घटना के एक दिन पहले 21 जुलाई को बहनों के बीच टीवी देखने को लेकर झगड़ा हुआ था. इसके बाद भी परिजनों का कहना था कि उनकी बेटी साहसी थी. वह कभी आत्महत्या नहीं कर सकती है. परिजनों ने फिर से हत्या की आशंका जतायी. वहीं पिता ने बताया था कि झगड़ा के वक्त वे समस्तीपुर में नौकरी पर थे. शाम में जब वे घर आये तो सबकुछ सामान्य हो चुका था. लेकिन कॉल डिटेल से पता चला कि झगड़ा के बाद घर में तनाव होने के कारण श्री सिन्हा तुरंत समस्तीपुर से चल दिये थे. वे दोपहर करीब 2.30 बजे घर आ गये थे. इसके बाद दोनों को समझाकर शांत कराया गया.
