दरभंगा : एक जमाने में शहर की खुबसूरती में चार चांद लगाने वाले विशाल सरोवरों के दिन बहुरने के आसार प्रबल हो गये हैं. वर्षों तक ठंडे बस्ते में पड़ी इन ऐतिहासिक तालाबों के सौंदर्यीकरण की योजना को अमली जामा पहनाने की दिशा में एक बार फिर सरकार तथा नगर निगम प्रशासन सक्रिय हुआ है. इसे लेकर डीपीआर तैयार किया जा रहा है. जल्द ही प्रदेश सरकार के पास नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए इस प्रस्ताव को भेजा जायेगा. उम्मीद जतायी जा रही है कि चालू वर्ष में सौंदर्यीकरण का काम आरंभ हो जायेगा. यहां बता दें कि इस योजना के तहत हराही, दिग्घी तथा गंगासागर तालाब का सौंदर्यीकरण किया जाना है.
चार साल बाद शुरू हुई कवायद : शहर की खुबसूरती पर देख-रेख तथा संरक्षण के अभाव में बदनूमा धब्बे बन चुके इन तालाबों को आकर्षक लुक देने की कवायद करीब चार साल बाद फिर से तेज हुई है. जानकारी के मुताबिक वर्ष 2013 से पूर्व प्रदेश में जब एनडीए की सरकार थी तो उस समय इन तीनों तालाबों के सौंदर्यीकरण की योजना बनायी गयी थी.
गठबंधन टूटने के बाद यह योजना ठंडे बस्ते में चली गयी. सूबे में फिर से राजग सरकार बनने के तुरंत बाद इस योजना को संजीवनी मिली है. गत शनिवार को नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद के आगमन पर इसकी चर्चा हुई. साथ ही डीपीआर बनाकर भेजने का निर्देश दिया गया.
90 करोड़ से होगा सौंदर्यीकरण
तीनों तालाबों का सौंदर्यीकरण करीब 90 करोड़ की लागत से किया जायेगा. इसके लिए सीकॉन कंपनी को डीपीआर बनाने का जिम्मा दिया गया था. शनिवार की बैठक में सीकॉन कंपनी के प्रतिनिधि भी मौजूद थे. डीपीआर बनाकर वुडको को सौंपा जायेगा. इसके बाद वन विभाग को प्रस्ताव भेजा जायेगा. प्रदेश सरकार से एनओसी मिलने के बाद राशि के प्रावधान पर निर्णय होगा.
एक वर्ष पहले केंद्रीय मंत्री ने मांगा था प्रस्ताव
केंद्र सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर यहां पहुंचे केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पियुष गोयल ने तत्कालीन नगर निगम के मेयर गौड़ी पासवान से इन तालाबों के सौंदर्यीकरण को लेकर प्रस्ताव तैयार कर भेजने के लिए कहा था.
उस समय उन्होंने केंद्र की एनएलसीपी योजना का हवाला देते हुए कहा था कि ऊर्जा विभाग से भी वे इसमें सहयोग करेंगे. बताया जाता है कि इस बीच निगम से प्रस्ताव के साथ प्रजेंटेशन के लिए पत्र आया. दुर्भाग्य यह रहा कि निर्धारित तिथि के बाद निगम प्रशासन को इस बाबत पत्र मिल सका. इसके बाद दुबारा तिथि ही तय नहीं हो सकी.
