चंद्रग्रहण से पहले ही बन रहा उत्तम मुहूर्त
कमतौल : अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिये हर बहन रक्षा बंधन के दिन का इंतजार करती है. श्रावण मास की पूर्णिमा को यह पर्व मनाया जाता है. वर्तमान में यह त्यौहार बहन-भाई के प्यार का पर्याय बन चुका है. कहा जा सकता है कि यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और गहरा करने वाला पर्व है. एक ओर जहां भाई-बहन के प्रति अपने दायित्व निभाने का वचन देता है, तो दूसरी ओर बहन भी भाई की लंबी उम्र के लिये उपवास रखती है.
इस दिन भाई की कलाई पर जो राखी बहन बांधती है वह सिर्फ रेशम की डोर या धागा मात्र नहीं होती बल्कि वह बहन-भाई के अटूट और पवित्र प्रेम का बंधन और रक्षा पोटली जैसी शक्ति भी उस साधारण से नजर आने वाले धागे में निहित होती है.
डॉ संजय कुमार चौधरी ने बताया कि श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर रक्षा बंधन सात अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा. सेवानिवृत्त शिक्षक नवीन चन्द्र ठाकुर ने बताया कि किसी भी रिश्तें की मजबूती की बुनियाद होती है विश्वास, और यही विश्वास एक बहन अपने भाई पर रखती है. डॉ. चौधरी ने बताया कि सोमवार सात अगस्त को सूर्योदय से पूर्व ही पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी, जो रात के 11 बजकर 41 मिनट तक रहेगी. इसके अलावा चंद्र ग्रहण के सूतक का समय दोपहर 1.52 मिनट से शुरू हो जाएगा. इसलिए इस बार बहनों को चंद्रग्रहण का सूतक लगने से पहले ही भाईयों को राखी बांधनी होगी. यह समय सुबह नौ बजे से लेकर दोपहर 1.50 मिनट तक रहेगा. इस समय के बीच राखी बांधना शुभ रहेगा. बता दें कि इस बार रक्षा बंधन पर खंडग्रास चंद्र ग्रहण पड़ रहा है.
