डीएमसीएच के डॉक्टर के हस्ताक्षर का फर्जीवाड़ा

केन्द्रीय भंडारण निगम ने एक कर्मी के मेडिकल क्लेम की सत्यता जानने पर हुआ खुलासा दरभंगा : उत्तर बिहार का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान डीएमसीएच में अब शायद इलाज के बजाय सबकुछ हो सकता है. मरीजों के जीवन से खिलवाड़ की बात तो सामने आती ही रहती है. अब एक नया मामला सामने आया है. […]

केन्द्रीय भंडारण निगम ने एक कर्मी के मेडिकल क्लेम की सत्यता जानने पर हुआ खुलासा

दरभंगा : उत्तर बिहार का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान डीएमसीएच में अब शायद इलाज के बजाय सबकुछ हो सकता है. मरीजों के जीवन से खिलवाड़ की बात तो सामने आती ही रहती है. अब एक नया मामला सामने आया है. मामला सामने आने के बाद चिकित्सक भी अचंभित हैं. इस नये मामले में डीएमसीएच के मेडिसीन विभाग के चिकित्सक डॉ जीएन झा के फर्जी हस्ताक्षर का मामला सामने आया है.
जमालचक दरभंगा निवासी मो. मुस्लिम की पत्नी और केन्द्रीय भंडारण निगम की पूर्व कर्मचारी जुबैदा खातून 4 अप्रैल 2017 को डीएमसीएच के आउटडोर स्थित मेडिसीन विभाग में टाइफाइड के इलाज के लिये रजिस्ट्रेशन कराया. दवा की परची के अनुसार उसपर चिकित्सक ने दो महीने का दवा लिख दिया. लेकिन मरीज ने नौ हजार रुपये खर्च कर पैथो क्लिनिक से अपनी जांच करायी और छह हजार रुपये का दवा खरीदा इसका परची लेकर प्रावधान के अनुसार जुबैदा ने केन्द्रीय भंडारण निगम में मेडिकल क्लेम किया.
बताया जाता है कि निगम को इसपर शक हुआ. निगम ने इसके लिए डीएमसीएच अधीक्षक को जुबैदा के इलाज के बारे में पूरी जानकारी मांगी. अधीक्षक ने जांच के लिए मेडिसीन विभागाध्यक्ष डॉ बीके सिंह को पत्र लिखा. लेकिन जब डॉ जीएन झा ने परची देखी तो उसपर उनका फर्जी हस्ताक्षर था. साथ ही परची पर कुछ ऐसे दवा का नाम लिखा हुआ था जिसके बारे में डॉ झा को खुद पता नहीं था. डॉ जीएन झा ने स्पष्ट किया कि इस परची पर लिखा गया दवा और हस्ताक्षर उनके नहीं है.
सवाल उठता है कि डीएमसीएच में कितने तरह के रैकेट चलते हैं. रैकेट में कौन-कौन लोगा शामिल हैं. इसकी गहनता से जांच की जाये तो कई चौंकाने वाले मामले सामने आयेंगे लेकिन, अस्पताल प्रशासन इस तरह के मामले में गोलमोल जवाब देकर अपना पल्ला झाड़ लेती है. यही कारण है कि डीएमसीएच की गरिमा समाप्त होते जा रही है.

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