अधिकांश काम में गुणवत्ता का
नहीं रखा गया खयाल
पहले की जांच में उजागर हो चुकी
है अनियमितता
हाइकोर्ट ने चालू माह के अंत तक काम पूरा करने का दे रखा है आदेश
दरभंगा : शहर के लोगों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने को ले पीएचइडी द्वारा किये गये कार्य की जांच होगी. विभाग ने कार्य पूरा कर लिये जाने का दावा करते हुए निगम को हैंड ओवर व टेक ओवर को कहा था. इस पर निगम ने निर्णय लिया है कि पहले किये गये कार्यों की जांच करायी जायेगी फिर आगे निर्णय लिया जायेगा. निगम ने पीएचइडी द्वारा बनाये गये जलमीनार, पाईप लाईन व स्टैंड पोस्ट आदि की संयुक्त जांच को लेकर तिथि निर्धारित करने के लिए लोक स्वास्थ्य प्रमंडल को पत्र भेजा है.
भेजे गये पत्र में कहा गया है कि विभागीय निर्देश पर अब- तक किये गये कार्यो की जांच पीएचइडी व निगम के अभियंता संयुक्त रूप से करेंगे. इसके बाद ही हैंडओवर व टेकओवर की प्रक्रिया अपनाई जायेगी. पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी व नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद को भी भेजी गयी है.
साल भर पहले ही काम पूरा होने का किया गया था दावा: पीएचइडी विभाग ने करीब साल भर पहले भी हैंडओवर के लिये निगम से कहा था. हालांकि बताया जाता है कि उस समय कई काम पूरा नहीं हो सका था. निगम को यह जानकारी मिली तो अधिकारियों ने हैंडओवर से इनकार कर दिया. बाद में इसे लेकर लगातार पत्राचार जारी है. वहीं किये गये कार्यो की जांच को ले निगम ने नगर विधायक संजय सरावगी की अध्यक्षता में पार्षदों की सर्तकता निगरानी टीम गठित का दी थी. टीम के द्वारा जांच के दौरान पाया गया कि बिछाये गये पाईप लाईन से कई स्थानों पर लिकेज है. स्टैंड पोस्टों से टोटी गायब है. जलमीनार में लिकेज की समस्या है. समिति ने इन सभी समस्याओं का उल्लेख करते हुए अपनी रिपोर्ट निगम को सौंप दी थी. इस रिपोर्ट को विभाग को भेज दिया गया था. इस बीच एजेंसी रिपोर्ट के खिलाफ हाईकोर्ट चली गयी. एजेंसी के कार्यो को अपूर्ण मानते हुये कोर्ट ने अगस्त 2017 तक कार्य पूर्ण करने का आदेश दे रखा है. जानकारी के अनुसार जिस स्थिति में काम है उसी स्थिति में हैडओवर की बात कही जा रही है. विभाग का निर्देश आया है कि शेष काम जल पर्षद पूरा करेगा.
जांच की तिथि निर्धारण को ले निगम ने भेजा पीएचइडी को पत्र
12 सालों से चल रहा
जलापूर्ति योजना का काम
शहरी जलापूर्ति योजना को पूरा करने का काम पीएचइडी को वर्ष 2006 में सौंपा गया था. पीएचइडी विभाग ने योजना पूरा करने का काम कलकत्ता की एजेंसी किर्लोस्कर ब्रदर्स को सौंपी. विभाग के निर्देश पर निगम काम के लिए करीब 32 करोड़ रूपये का भुगतान कर चुका है. करीब 12 वर्ष से यह काम चल रहा है. हर साल निगम लोगों को गर्मी के समय यह आश्वासन देता रहा कि अब काम पूरा हो रहा है. इसके बाद पेयजल की समस्या नहीं रहेगी. बावजूद लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है. पाईप बिछाने को लेकर कई मुहल्लों में क्रंक्रीट सड़क तोड़ कर एजेंसी ने छोड़ दिया. इस कारण आये दिन लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं.
22 करोड़ से 32 करोड़ तक पहुंची लागत
जलापूर्ति योजना को लेकर अब तक निगम करीब 32 करोड़ रूपया पीएचइडी को भुगतान कर चुका है. वर्ष 2006 में जब योजना तैयार की गयी थी तब इसका अनुमानित व्यय करीब 22 करोड़ ही था. कार्य में देरी के कारण लागत राशि में और 10 करोड़ की वृद्धि हो चुकी है.
अब तक 60 फीसदी काम ही पूरा
वर्ष 2006 में जलापूर्ति योजना की स्वीकृति मिली थी. इसके तहत दो फेज में शहर के विभिन्न हिस्सों में नौ जलमीनार बनाये जाने थे. प्रथम फेज में 32.6 किलोमीटर व दूसरे फेज में 79.76 किलोमीटर में पाईप लाईन बिछाने के साथ स्टैंड पोस्ट भी लगाया जाना था. 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी महज 60 फीसदी ही काम पूरा हो सका है. पीएचइडी द्वारा काम में शिथिलता के कारण समय के साथ-साथ लागत की राशि भी अधिक निगम को चुकानी पड़ रही है.
पीएचइडी ने बनाये नौ जलमीनार
पीएचइडी द्वारा कुल नौ जलमीनार बनाया गया है. इसमें लक्ष्मीसागर स्थित पशुपालन विभाग परिसर, नगर निगम गोदाम परिसर, जिला स्कूल, पीएचइडी कार्यालय, सुंदरपुर स्थित महात्मा गांधी कालेज परिसर, मिल्लत कालेज परिसर, सैदनगर काली मंदिर परिसर, राय साहब पोखर के निकट जलमीनार बनाया गया है. इसमें कई मीनार लिकेज बताया जा रहा है. वहीं जिला स्कूल स्थित पंप हाउस से मिट्टीयुक्त पानी निकलने की बात बतायी जा रही है.
अब तक दिये कनेक्शनों की संख्या
पीएचइडी द्वारा निगम को दिये गये प्रतिवेदन में कहा गया है कि अबतक 1132 घरों में पानी का कनेक्शन दे दिया गया है. जबकि करीब 54 हजार घरों में कनेक्शन दिया जाना है.
कार्य को लेकर सवाल उठता रहा है. पहले इसकी जांच करायी जाएगी. इसके लिए पीएचइडी विभाग व निगम की संयुक्त टीम बनायी जा रही है. रिपोर्ट आने के बाद ही हैंडओवर टेक ओवर होगा.
नागेंद्र कुमार सिंह, नगर आयुक्त
