दिव्यांग छात्रों के भोजन पर आफत विडंबना. जर्जर है रसोइघर

दरभंगा : अंधेरे में लिपटी जिंदगी में शिक्षा का प्रकाश फैलाने के लिए जद्दोजहद कर रहे नेत्रहीन छात्रों के निवाले पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है. विभागीय अनदेखी की वजह से किसी भी दिन नौनिहालों का भोजन बंद हो सकता है. ना तो इन छात्रों को भोजन बनाने से मना कर देनेवाले रसोइयों को […]

दरभंगा : अंधेरे में लिपटी जिंदगी में शिक्षा का प्रकाश फैलाने के लिए जद्दोजहद कर रहे नेत्रहीन छात्रों के निवाले पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है. विभागीय अनदेखी की वजह से किसी भी दिन नौनिहालों का भोजन बंद हो सकता है. ना तो इन छात्रों को भोजन बनाने से मना कर देनेवाले रसोइयों को भुगतान की दिशा में सामाजिक सुरक्षा कोषांग गंभीर है और न ही जर्जर हो चुके रसोईघर की मरम्मत की दिशा में भवन निर्माण विभाग ही संजीदा है.

उत्तर बिहार का इकलौता विद्यालय : दृष्टि बाधित छात्रों के लिए सरकार ने प्रदेश में मात्र दो स्थानों पर नेत्रहीन उच्च विद्यालय खोल रखे हैं. इसमें पटना के अलावा दूसरा विद्याल यहां अवस्थित है. इसमें 58 बच्चों के लिए सीट है. इसमें 40 फिलहाल नामांकित हैं. मालूम हो कि दृष्टिबाधित बच्चों के लिए श्री कामेश्वरी प्रिया पूअर होम राजकीय नेत्रहीन उच्च विद्यालय में इस तरह के बच्चों को आवासीय शिक्षा देने की व्यवस्था सरकार ने कर रखी है. यहां के रसोई घर जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है.
रसोई घर में जमा रहता है पानी
रसोई घर की छत एस्बेस्टस की है. यह जगह-जगह से टूट चुका है. बरसात होने पर सीधे पानी रसोई घर में गिरता है. इससे जहां एक ओर खाना पकाने में समस्या होती है, वहीं स्टोर रूम में पानी जमा रहता है. इससे सामान तो बर्बाद होता ही है, बच्चों के संक्रमण का भी खतरा है. वहीं एस्बेस्टस जिस लड़की के टुकड़े (कड़ी) पर टिका है, वह टूट गया है. इस वजह से यह कभी भी धराशायी हो सकता है. जान जोखिम में डाल रसोइए इसमें काम करते हैं.
यहां दो रसोइए संविदा पर बहाल हैं. इसमें एक सुधीर पाठक वर्ष 2012 से तथा ललित कुमार एक साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं. इन दोनों को विभाग की ओर से मासिक पांच हजार रुपये तय हैं. वर्ष 2016 के नवंबर माह के बाद से इन दोनों को मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है.
शिक्षक की पूर्ण पदस्थापन की जरूरत : तत्कालीन डीएम संतोष कुमार मल ने यहां की समस्या को देखते हुए बिहार शिक्षा परियोजना के समावेशी शिक्षक मिथिलेश कुमार कर्ण को यहां सप्ताह में तीन दिनों के लिए प्रतिनियोजित किया था. वर्ग दसवीं के कन्हाई कुमार चौधरी व अंकित कुमार राय, कक्षा आठवीं के मुन्ना कुमार आदि का कहना है कि श्री कर्ण के आने से पढ़ाई में काफी सहूलितयत हुई. अच्छे शिक्षक होने के साथ ही उन्हें ब्रेल लिपि का भी ज्ञान है. बच्चे श्री कर्ण को यहां सातों दिन के लिए पदस्थापित करने की मांग करते हैं.
बताया जाता है कि जब भुगतान के लिए समाजिक सुरक्षा कोषांग के पदाधिकारी से आग्रह किया जाता है तो वे गंभीरता नहीं दिखाते. भुगतान का आदेश नहीं दे रहे. बहाना बनाकर टाल जाते हैं.
उधर, प्रभारी प्रधानाध्यापक राकेश किरण झा बताते हैं कि इन तमाम समस्याओं से विभागीय पदाधिकारी को अवगत
कराया जा चुका है. रसोईघर के बारे में भवन निर्माण विभाग को भी
लिखा गया है. समाधान नहीं हो सका है. उपलब्ध संसाधन के बीच बेहतर
प्रबंधन की कोशिश हो रही है.

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