Chirag Paswan: देश और बिहार में इन दिनों आरक्षण की समीक्षा को लेकर बहस चल रही है. एक ओर चिराग पासवान का कहना है कि आरक्षण हटाने की बात तो दूर, इसमें समीक्षा भी नहीं होने देंगे. वहीं जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन का कहना है कि करीब 79 वर्षों से आरक्षण का लाभ कुछ जातियों को ज्यादा मिलता आ रहा है. इसकी वजह से बाकी जातियां अभी भी पीछे हैं. ऐसे में आरक्षण की समीक्षा जरूरी है.
क्या बोले थे संतोष सुमन
पटना में एक कार्यक्रम के दौरान बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन ने कहा था कि आरक्षण का प्रावधान बाबा साहेब ने इसलिए लाया था, ताकि समाज के सबसे पिछड़े वर्ग का भला हो. वे आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम बनें और इज्जत के साथ अपनी जिंदगी जी सकें. संतोष सुमन ने कहा कि आरक्षण लागू होने के करीब 79 साल बाद भी एससी और एसटी में आने वाले ज्यादातर लोग अभी भी कई क्षेत्रों में पीछे हैं. ऐसे में इसकी समीक्षा होनी चाहिए.
दलित समाज एक जैसा नहीं है- संतोष सुमन
संतोष सुमन ने कहा कि दलित समाज को एक जैसा वर्ग नहीं माना जा सकता. इसके अंदर भी लोगों की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति अलग-अलग है. उनके मुताबिक, अगर कुछ जातियां आरक्षण का फायदा लगातार ज्यादा ले रही हैं और कुछ जातियां आज भी पीछे हैं, तो सबसे पिछड़े लोगों तक मौके पहुंचाने के लिए उप-वर्गीकरण पर विचार होना चाहिए. संतोष सुमन के इस बयान को लेकर जब उनके पिता जीतन राम मांझी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह सुमन की बातों का समर्थन करते हैं.
संविधान बदलना है तो संसद में आकर बदलें- चिराग
आरक्षण के संवैधानिक आधार को लेकर चिराग पासवान ने कहा कि अगर कोई इसमें बदलाव करना चाहता है तो उसे संविधान में बदलाव करना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी लोग लोकसभा में आएं और संविधान बदलने की प्रक्रिया अपनाएं. चिराग ने साफ कहा कि एससी और एसटी के आरक्षण का आधार सामाजिक भेदभाव है. खास तौर पर उन्होंने समाज में छुआछूत की समस्या को इसका अहम कारण बताया.
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क्रीमी लेयर पर भी चिराग ने उठाए सवाल
एससी और एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग पर भी चिराग पासवान ने सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि अगर किसी को लगता है कि क्रीमी लेयर लागू होनी चाहिए तो पहले उन्हें खुद आरक्षण का लाभ छोड़ देना चाहिए.
चिराग ने इस मुद्दे पर बिहार के नेता जीतन राम मांझी का नाम लेते हुए कहा कि अगर मांझी क्रीमी लेयर लागू करने की बात का समर्थन करते हैं तो उन्हें पहले इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर मांझी खुद क्रीमी लेयर के दायरे में आते हैं तो उन्हें और उनके बेटे को भी आरक्षण का लाभ छोड़ देना चाहिए.
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