खुलासा. आइएसआइ के लिए काम करता है सैफी उर्फ चाचा
बेतिया : जाली नोटों की तस्करी का मामला पाकिस्तान की आइएसआइ से जुड़े होने के नाते इसकी जांच एनआइए को सौंपी गयी है. इस मामले की जांच एनआइए को तब सौंपी गयी, जब अप्रैल 2014 में दुबई से लौट रहे बिहार निवासी इकरामुल अंसारी को दिल्ली एयरपोर्ट 50 लाख रुपये के एक-एक हजार की नकली नोट के साथ गिरफ्तार किया गया था. इकरामुल अंसारी ने पूछताछ में अबी अहमद के भी इस जाली नोट के धंधे में शामिल होने की जानकारी एनआइए को दी थी.
इसके अलावे दुबई में बैठे पाकिस्तानी कारोबारी सैफी उर्फ चाचा, शारदा शंकर महतो, नेपाल निवासी नूर मोहम्मद व नेपाल के ही फरमुल्लाह का भी नाम बताया था. इकरामुल अंसारी के खुलासे पर एनआइए ने इन सभी के खिलाफ मामला दर्ज कर कर जांच में जुटी थी. इसमें अबी अहमद के खिलाफ एनआइए कोर्ट से वारंट जारी था, साथ ही उसपर 50 हजार का इनाम भी घोषित कर दिया गया था. गुरूवार को अबी अहमद की गिरफ्तारी के बाद एनआइए को कई और अहम जानकारियां मिली है.
कश्मीर तक पैसा पहुंचाना चाहता है आइएसआइ : गिरफ्तार अबी अहमद ने कई खुलासे किये हैं. सूत्रों की माने तो आइएसआइ भारतीय नई करेंसी कश्मीर तक पहुंचाने की फिराक में है. इसके लिए उसने दुबई में बैठे सफी उर्फ चाचा से संपर्क कर सभी नेटवर्क को सक्रिय कर दिया है. आइएसआइ की चाल है कि यह जाली करेंसी कश्मीर के पत्थरबाजों तक पहुंच जाये. ताकि प्रलोभन देकर कश्मीर को और अशांत किया जाय. बीते 8 फरवरी को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में 2000 के 40 नकली नोटों के साथ 26 साल के अजीजुर्रहमान पकड़ा गया था. उसने भी नोटों के पाक में छपने और आईएसईआई की मदद से इनके भारत तक आने की बात बताई थी.
