बढ़ने लगी गरमी, घटने लगी आपूर्ति
बेतिया : जैसे-जैसे गरमी बढ़ रही है वैसे-वैसे बिजली की आपूर्ति घटती जा रही है. वहीं बिजली होने पर भी लो-वोल्टेज की समस्याएं भी सिर चढ़कर बोलने लगी है. 24 घंटे में छह से आठ घंटे बिजली कटौती से आम उपभोक्ता त्रस्त हैं. खासकर रात और सुबह में बिजली कटौती उपभोक्ताओं की परेशानी को बढ़ा […]
बेतिया : जैसे-जैसे गरमी बढ़ रही है वैसे-वैसे बिजली की आपूर्ति घटती जा रही है. वहीं बिजली होने पर भी लो-वोल्टेज की समस्याएं भी सिर चढ़कर बोलने लगी है. 24 घंटे में छह से आठ घंटे बिजली कटौती से आम उपभोक्ता त्रस्त हैं.
खासकर रात और सुबह में बिजली कटौती उपभोक्ताओं की परेशानी को बढ़ा रही है. उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली आपूर्ति की पुरानी व्यवस्था गरमी के आगमन के साथ ही ध्वस्त हो चुकी है. बिजली के विभागीय रोस्टर का कोई मतलब नहीं है. बिजली कब आयेगी और कब चली जायेगी? इसका कोई निर्धारित समय नहीं रह गया है. हद तो यह कि पीक आवर में प्राय : बिजली की आपूर्ति ठप होने से उपभोक्ताओं को कई तरह की समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है. घरों की गृहणियों को बिजली आपूर्ति ठप होने से रसोईघरों में जलापूर्ति की समस्याएं झेलनी पड़ रही है.
सीबीएसई के इंटर के छात्रों की परीक्षा के समय बिजली की यह आंख मिचौली से उनके पठन-पाठन पर गहरा असर पड़ रहा है. कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि यदि वे इस संबंध में पावर सब स्टेशन को फोन लगाते हैं तो फोन व्यस्त या कवरेज एरिया से बाहर बताता है. सहायक विद्युत अभियंता का फोन पर जवाब नहीं मिलेगा या कॉल डायवर्ट रहता है. कनीय अभियंता से यदि किसी तरह संपर्क हो भी गया तो वे लोड सेटिंग, तकनीकी गड़बड़ी, तार गिरने अथवा जम्फड़ जलने की बात बताकर पल्लू झाड़ लेते हैं.
24 में 22 घंटे बिजली आपूर्ति का विभागीय दावा साबित हो रहा खोखला
तकनीकी गड़बड़ी व लोड शेटिंग के बहाने विभागीय अधिकारी झाड़ रहे पल्ला
गर्मी में बिजली की लचर व्यवस्था को कोसने लगे उपभोक्ता
गरमी के दिन में बिजली खर्च बढ़ जाता है. जिले में अपना बिजली का उत्पादन नहीं है. अन्य जिले में पावर अधिक होने की स्थिति में यहां मिलती है. दूसरे जिले में पावर अधिक नहीं रहा तो इस जिले में बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है. कम मिलने से लोड सेटिंग में जलना मजबूरी हो जाती है.
कुमार प्रशांत, विद्युत कार्यपालक अभियंता, विद्युत प्रमंडल, बेतिया