ओलावृष्टि से लाखों की क्षति

आंधी-तूफान . एक सप्ताह के अंदर दूसरी बार अायी आफत आंधी-पानी के साथ ओला गिरने से फसलें व मंजर बर्बाद किसानों की टूटी कमर, चेहरे पर चिंता की रेखाएं गौनाहा : पश्चिमी चंपारण के नेपाल सीमावर्ती गौनाहा अंचल में एक सप्ताह के दौरान दूसरी बार प्राकृतिक आपदा से सभी लोग भयाक्रांत हैं. हालांकि किसी जान […]

आंधी-तूफान . एक सप्ताह के अंदर दूसरी बार अायी आफत

आंधी-पानी के साथ ओला गिरने से फसलें व मंजर बर्बाद
किसानों की टूटी कमर, चेहरे
पर चिंता की रेखाएं
गौनाहा : पश्चिमी चंपारण के नेपाल सीमावर्ती गौनाहा अंचल में एक सप्ताह के दौरान दूसरी बार प्राकृतिक आपदा से सभी लोग भयाक्रांत हैं. हालांकि किसी जान को तो क्षति नहीं पहुंची है. परंतु आंधी-तूफान संग ओलावृष्टि से किसानों की कमर टूट गयी है.
उनके माथे पर चिंता की काली रेखाएं उभर गयी हैं. अंचल के सभी थाना क्षेत्रों में भयंकर ओलावृष्टि के बीच आंधी-तूफान संग पानी बरसने से सभी तरह की रबी फसलें बर्बाद हो गईं. खासकर सब्जी, मक्का, तेलहन, दलहन, गन्ना, आम, लीची समेत अन्य फसलें बर्बाद हो गईं हैं.
बताया जाता है कि शुक्रवार की रात करीब 1 बजे से डेढ़ बजे तक लगातार ओलावृष्टि के साथ आंधी, तुफान और ओलावृष्टि के बीच पानी बरसती रही. इससे अंचल के महुई, मटियरिया, मेहनौल, डरौल, बेलसंडी, सिठी,
जमुनिया, धमौरा, धनौजी, बजड़ा, मंझरिया, भितिहरवा, माधोपुर, बेलवा, लक्षनौता, पंचायतों के सभी गांवों में इस भारी असर देखा गया. ग्रामीणों के अनुसार पिछले 20 मार्च को इसी तरह की ओलावृष्टि से किसान उबर नहीं पाये थे कि दूसरी बार 24 मार्च की रात में इसकी पुनरावृति हो गयी. जिससे बाकी बची फसलें भी बर्बाद हो गईं.
पहली क्षति की भरपायी नहीं, मौसम ने दोबारा दे िदया दर्द : गौनाहा अंचल में पूर्व में हुई ओलावृष्टि से क्षति की अब तक किसी को चिंता नहीं है. इसकी न तो प्रशासनिक और विभागीय स्तर से जांच हुई और न किसी भी किसान को क्षतिपूर्ति ही दी गयी. इस बीच आपदा की पुनरावृति से यहां के किसान समेत सभी ग्रामीण भयाक्रांत हैं. उनका कहना है कि इसी तरह की स्थिति रही तो उनके समक्ष आकाल का संकट खड़ा हो जायेगा. इस बीच प्रखंड कृषि पदाधिकारी रवि कुमार ने बताया कि शीघ्र जांच टीम गठित कर क्षतिपूर्ति दी जायेगी.
घटिया पुल निर्माण को ले रोषपूर्ण प्रदर्शन
विरोध : एक
चनपटिया. प्रखंड के लखौरा पंचायत के विशुनपुरवा गांव में मुख्यमंत्री सेतु योजना से बने सड़क पुल में गड़बड़ी को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने रोषपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया.
प्रदर्शनकारियों में सरपंच कुंदन कुमार, पूर्व सरपंच मोहन प्रसाद, वार्ड सदस्य हरिबसंत मिश्र, दारोगा यादव, अलम आलम, सरफुद्दीन मियां, नकछेद मियां आदि का कहना था कि पुल निर्माण में संवेदक की ओर से नियम एवं प्राक्कलन की धज्जियां उड़ाते हुए घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग कर जैसे-तैसे पुल को बना दिया गया. इससे इस पुल के दीवार में दरार पड़ गया है. यह भी आरोप था कि करीब 22 लाख की लागत से बने इस पुल में लोकल बालू एवं घटिया ईंट का प्रयोग किया गया है. कार्यस्थल पर न तो शिलापट्ट है और नहीं योजना संख्या का ही उल्लेख किया गया है. ग्रामीणों का आरोप है कि यह पुल गांव की लाइफलाइन है. फिर भी घटिया निर्माण के कारण इसके कभी भी ध्वस्त होने की आशंका है. साथ ही पुल के दोनों तरफ एप्रोच पथ भी जैसे तैसे बना दिया गया है. मिट्टी भराई भी सही ढंग से नहीं किया गया है. इसके बरसात में कभी भी ध्वस्त होने की आशंका है और कभी भी आवागमन बाधित होने से ग्रामीण चिंतित हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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