छह घंटे ओपीडी व पांच घंटे ठप रखी इमरजेंसी

मेडिकल कॉलेज. निर्माणाधीन भवन को ले आमने-सामने रहे एमबीबीएस छात्र व हॉस्पिटल के कर्मचारी एमजेके अस्पताल के कर्मचारी व एमबीबीएस छात्रों के हंगामा के बीच हॉस्पिटल में आये मरीजों की आवाज गुम सी दिखी. डॉक्टर, अस्पताल, जिला व पुलिस प्रशासन सभी हंगामा को शांत करने में जुटे दिखे. अस्पताल में भरती मरीजों और आनेवाले मरीजों […]

मेडिकल कॉलेज. निर्माणाधीन भवन को ले आमने-सामने रहे एमबीबीएस छात्र व हॉस्पिटल के कर्मचारी

एमजेके अस्पताल के कर्मचारी व एमबीबीएस छात्रों के हंगामा के बीच हॉस्पिटल में आये मरीजों की आवाज गुम सी दिखी. डॉक्टर, अस्पताल, जिला व पुलिस प्रशासन सभी हंगामा को शांत करने में जुटे दिखे. अस्पताल में भरती मरीजों और आनेवाले मरीजों को देखने-सुनने वाला कोई नहीं था.
बेतिया : गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज व एमजेके हॉस्पिटल के कर्मचारियों के बीच हुई तनातनी की वजह से मरीजों को सांसत झेलनी पड़ी. ओपीडी ठप रहने से दूर-दराज से आये करीब 600 मरीज मायूस लौट गये. जबकि इमरजेंसी के मरीज भी लौटा दिये गये. हॉस्पिटल में भरती मरीजों को भी कोई देखने वाला नहीं था. हालात देख परिजन अपने मरीजों को निजी हॉस्पिटल लेकर गये. इस हंगामे की वजह से गुरुवार को पूरे छह घंटे ओपीडी व पांच घंटे इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह से ठप रही. गुस्साये छात्रों ने डॉक्टरों को ओपीडी में नहीं जाने दिया. वहीं हॉस्पिटल कर्मचारियों ने इमरजेंसी में ताला लटका कर काम-काज बंद कर दिया.
दायर रिट ने तैयार की विवाद की जमीन , गुरुवार को दिखा नतीजा :सूत्रों की मानें तो गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को जो कुछ भी हुआ, उसकी पटकथा उसी दिन तैयार हो गयी थी जिस दिन हॉस्पिटल कर्मचारियों की ओर से हाइकोर्ट में रिट दायर की गयी थी. हॉस्पिटल कर्मचारी बिना आवास की वैकल्पिक व्यवस्था हुए अपना आवास खाली करने काे तैयार नहीं थे. लिहाजा कर्मचारियों की ओर से हाइकोर्ट में रिट दाखिल कर दी गयी.
उसी दिन से एमबीबीएस छात्र गुस्से में थे. इन छात्रों का मानना है कि मामला कोर्ट में जाने से फिर निर्माण रूक जायेगा. लिहाजा दोनों गुट के बीच चल रही आपसी खुन्नस हर रोज टकरी रही थी. छात्र बिल्डिंग निर्माण में तेजी लाने के लिए ठेकेदार पर दबाव डाल रहे थे, तो कर्मचारियों की ओर से आवास खाली नहीं किया जा रहा था. इसी मुद्दे को लेकर इन दोनों के बीच चल रहा आपसी खुन्नस फूट पड़ा. दोनों गुट खुले तौर पर आमने-सामने आ गये. इसको लेकर गुरुवार को मेडिकल कॉलेज व एमजेके हॉस्पिटल में पूरे दिन हंगामा होता रहा. नतीजा मरीजों को सांसत झेलनी पड़ी.
एसडीएम, एएसपी ने की मेडिकल कॉलेज में बैठक : मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य कक्ष में अधीक्षक, प्राचार्य के साथ एसडीएम सुनील कुमार, एएसपी राजेश कुमार व बिमलेन्दू कुमार ने बैठक की. बैठक के बाद एएसपी ने छात्र एवं कर्मचारियों को सख्त लहजे में कहा कि शांति व्यवस्था भंग व कानून को हाथ में नहीं ले. अगर वे ऐसा करते हैं,तो उनसे सख्ती से पेश आया जायेगा.
ये हैं छात्रों की मांगें
हाइकोर्ट में दायर याचिका वापस ली जाये
एमजेके हॉस्पिटल के कर्मचारी आवास खाली करें
मेडिकल कॉलेज को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाय
कर्मचारियों की मांग
आवास की पहले वैकल्पिक व्यवस्था की जाये
हंगामा करनेवाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई हो
तोड़फोड़ करने वाले छात्रों को चिन्हित कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी जाय
मेडिकल कॉलेज लॉइव
9.45 बजे: एमबीबीएस छात्रों ने ओपीडी ठप कर धरने पर बैठे
10.15 बजे: गुस्साये छात्रों ने जुलूस निकाला
10.20 बजे: अधीक्षक कक्ष व अस्पताल कर्मचारियों के आवास
पर तोड़फोड़
10.30 बजे: हॉस्पिटल की इमरजेंसी सेवाएं बाधित
10.50 बजे: प्राचार्य व अधीक्षक मौके पर पहुंच छात्रों को समझाने में जुटे
11.10 बजे: एसडीएम व एएसपी पहुंचे प्राचार्य व अधीक्षक संग की बैठक
2.30 बजे: प्राचार्य व अधीक्षक के आश्वासन पर माने दोनों गुट
इमरजेंसी व ओपीडी से लौटे मरीज, बयां किया अपना दर्द : गुरूवार को इलाज के लिए पहुंचे मरीज खासा परेशान दिखे. ओपीडी में आये मरीज जहां घंटों इंतजार के बाद वापस घर लौट गये, वहीं इमरजेंसी में आये मरीजों को निजी हॉस्पिटल ले जाना पड़ा. हॉस्पिटल में पहले से भरती कई मरीज भी स्थिति देख हॉस्पिटल से चले गये.
जगदीशपुर थाना के पकड़िया निवासी राजेश्वर ठाकुर का पुत्र झुन्नू ठाकुर तेज बुखार था. वह इमरजेंसी में आया था, लेकिन यहां इमरजेंसी बंद देख निजी हॉस्पिटिल गया. चनपटिया के रोहित को गंभीर रूप से घायल होकर हॉस्पिटल आया था, उसे भी परिजन निजी हॉस्पिटल ले गये. बैरिया के रोहन को भी निजी हॉस्पिटल ले जाना पड़ा. करीब दर्जनभर मरीजों को निजी हॉस्पिटल जाना पड़ा.

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