कॉलेज की कमियों में सुधार नहीं हुआ, तो नामांकन पर लगेगी रोक
एमसीआइ के निर्देश पर कॉलेज की कमियों की सुधार में जुटा प्रबंधन
शहर की सड़कों को ही बना लिया पार्किंग स्थल
समस्या. जाम की प्रमुख वजह, टेंपो की बेतरतीब हुई पार्किंग
बेतिया : शहर में जाम की समस्या आम हो गयी है. अमूमन हर रोज राहगीरों की जाम की समस्या से दो-चार होना पड़ता है. चाहे वह एनएच का छावनी हो या फिर व्यस्ततम इलाका तीन लालटेन व सोआ बाबू चौक का क्षेत्र हो. यहां जाम लाइलाज बन गया है. यूं कहें तो इन मार्गों पर दिन में कभी भी जाने में जाम नहीं मिले, तो यह चमत्कार से कम नहीं होगा. जाम की समस्याएं तब भीषण हो जाती हैं, तो वरीय अधिकारी आकर इसका जायजा ले लेते हैं और फिर वही सिलसिला शुरू हो जाती है.
ट्रैफिक में तैनात सिपाही जाम लगने पर मशक्कत करते दिखते हैं, लेकिन कभी भी इनके द्वारा जाम क्यों लग रहा है, इसे रोकने के लिए कोई पहल नहीं की जाती है. वरीय अधिकारी भी इसकी ओर से ध्यान नहीं देते हैं. जानकारों का मानना है कि शहर में जाम की प्रमुख वजहों में टेंपो चालकों की मनमानी है. जहां मन होता है, वहीं गाड़ी खड़ी करके यह सवारी बैठाना शुरू कर देते हैं. सोआ बाबू चौक से नेपाली पथ जाने वाली सड़क पर तो टेंपो ने पार्किंग स्टैंड ही बना लिया है.
रोड को बना दिया संकरा : यहां सड़कों पर गाड़ियां खड़ी रहती हैं और सवारी बैठाया जाता है. वह भी तब, जब यहां ट्रैफिक सिपाही भी तैनात है. बावजूद इसके इसपर रोक नहीं लगती है. जाम की दूसरी वजह अतिक्रमण है. सड़कों पर फुटपाथी दुकानदारों की कौन कहे स्थायी रुप से दुकान बनाकर अतिक्रमण कर सड़कों को संकरा बना दिया गया है. स्टेशन रोड हो या मीना बाजार, सोवाबाबू चौक विश्वमित्र मार्केट जंगी मस्जिद होते हुए अस्पताल रोड सभी जगह मुख्य सड़क अब गली में तब्दील हो गये है. शहर का शायद हीं कोई ऐसा सड़क हो जो अतिक्रमण से मुक्त हो. अतिक्रमण हटाओ अभियान कभी कारगर नहीं रही है.
शहर में पार्किंग को लेकर स्थान चिन्हित कर लिया गया है. पार्किंग की व्यवस्था जल्द ही कर दी जायेगी. वहीं प्रतिष्ठान, मॉल, होटल, रेस्टोरेंट आदि के संचालकों को खुद पार्किंग की व्यवस्था करनी है. अगर नहीं किया गया है,तो एक गंभीर मामला है. इनके यहां भी पार्किंग की व्यवस्था को ले निर्देश दिया जायेगा. ताकि सड़कों पर वाहन नहीं लगे.
डाॅ विपिन कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद बेतिया
प्रतिष्ठान तो खुल रहे, पर पार्किंग नदारद : शहर में नये प्रतिष्ठान, मॉल, होटल, रेस्टोरेंट आदि खुल रहे हैं. लेकिन, कभी भी पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं दिखती है. न हीं संचालक ही अपने प्रतिष्ठान के समाने पार्किंग का व्यवस्था करते हैं. पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़कों ग्राहक व आमलोग सड़कों पर ही वाहन लगा देते हैं. सड़कों पर वाहनों लगाने से जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है. जाम की समस्या से लोगों को काफी परेशानी होती है.
मीना बाजार में 2600 दुकानें, पार्किंग नहीं : शहर के मीना बाजार में 2600 दुकानें का हैं. यहां हर रोज हजारों लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं. जितनी भीड़ लोगों की होती है, उतनी भी दो पहिया वाहनों की भी रहती है. लेकिन, यहां पार्किंग का कोई इंतजाम नहीं है. सड़कों पर लोग अपनी बाइक व साइकिल खड़ी करते हैं. बाजार में तांगा स्टैंड हैं, वहां भी ठेलमठेल रहता है. सड़कों पर ठेले, खोमचों वालों का कब्जा है. लिहाजा यहां जाम लाजिमी है.
