शहर में कहीं नहीं नजर आती मोबाइल ट्रैफिक पुलिस
बेतिया : पश्चिम चंपारण जिले में ऐसे तो प्रत्येक सड़क पर हादसों की आशंका हर समय बनी रहती है. लेकिन सबसे ज्यादा दुर्घटनाओं की आशंका हर समय एनएच 28 बी पर बनी रहती है. यहां न तो दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कोई कारगर व्यवस्था है और न मोबाइल ट्रॉफिक या पुलिस का ही किसी […]
बेतिया : पश्चिम चंपारण जिले में ऐसे तो प्रत्येक सड़क पर हादसों की आशंका हर समय बनी रहती है. लेकिन सबसे ज्यादा दुर्घटनाओं की आशंका हर समय एनएच 28 बी पर बनी रहती है. यहां न तो दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कोई कारगर व्यवस्था है और न मोबाइल ट्रॉफिक या पुलिस का ही किसी खास जगह पर तैनाती दिखती है.
जिले के सर्वाधिक दुर्घटनाओं के डेंजर जोन के रूप में हरिवाटिका चौक, औद्योगिक परिक्षेत्र चौक, स्टेशन चौक, सुप्रिया चौक, छावनी चौक, मनुआपुल चौक चिह्नित हैं. इनमें सर्वाधिक खतरनाक स्थित छावनी चौक की है जहां आये दिन दुर्घटनाओं के कारण मौतें होती हैं. हालांकि कुछ दिनों पूर्व सरकार की ओर से एनएच 28 बी पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक मोबाइल वाहन की व्यवस्था हुई थी. लेकिन यह वाहन इन दिनों एनएच 28 बी पर नहीं दिखती. न तो इस पर किसी ट्रैफिक पुलिस की तैनाती ही नजर आती है.
रही बात ऑटो चालकों से जुड़ी व्यवस्था की तो इसमें भी काफी सुस्त स्थिति है. अधिक ऑटो चालकों को कमर्शियल लाइसेंस देने की तो वर्ष 2016-17 में जिला परिवहन विभाग की ओर से 121 चालकों को लाइसेंस निर्गत की गयी है. वाहन चलाने के लिए 18 वर्ष की उम्र सीमा निर्धारित है. परंतु यदि देखा जाय तो शहरी क्षेत्र में ही कई इससे कम उम्र के बच्चे भी ऑटो चलाते मिल जाते हैं.
ऐसे में ग्रामीण इलाकों की स्थिति तो और भी भयावह है. जहां तक ऑटो निबंधन में कहने मात्र के लिए चार एक और सात एक की सीटों का निर्धारण होता है, परंतु वास्तविकता कुछ अलग ही हैं. प्रत्येक ऑटों में 10 से 15 सवारियों को बैठे देखा जा सकता है. इस तरह दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन के पास कोई ठोस पहल दूर-दूर तक नजर नहीं आती है. शिव सेना के जिला प्रमुख अमितनाथ तिवारी की माने तो जिले के एनएच हो या अन्य प्रमुख सड़के कहीं भी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कोई कारगर व्यवस्था नहीं है.
उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से एनएच पर एक चलंत मोबाइल अस्पताल की व्यवस्था के लिए पथ निर्माण विभाग और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से संचालन की योजना बनी थी. यह योजना घोषणा के साथ ही दम तोड़ती नजर आ रही है.
खास बातें
दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन के पास नहीं है कोई कार्ययोजना
घोषणाओं के साथ दम तोड़
चुकी हैं दुर्घटनाओं को रोकने
की योजनाएं