सड़क के अभाव में नहीं होती शादी

विरोध. आवागमन के लायक नहीं है रोड, चारपाई पर बीमारों को ले जाते हैं अस्पताल दियारे का दर्द सड़क के लिए दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने किया उग्र प्रदर्शन 12 वर्ष में नहीं बन सकी योगापट्टी-ननकार-मदारपुर डीही सड़क सीएम नीतीश कुमार भी देख चुके हैं इस सड़क की दुर्दशा योगापट्टी (बेतिया) : सूबे में सड़कों […]

विरोध. आवागमन के लायक नहीं है रोड, चारपाई पर बीमारों को ले जाते हैं अस्पताल

दियारे का दर्द
सड़क के लिए दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने किया उग्र प्रदर्शन
12 वर्ष में नहीं बन सकी योगापट्टी-ननकार-मदारपुर डीही सड़क
सीएम नीतीश कुमार भी देख चुके हैं इस सड़क की दुर्दशा
योगापट्टी (बेतिया) : सूबे में सड़कों की जाल बिछ गयी. परंतु गांधी शताब्दी वर्ष में भी चंपारण के दियारावासियों का दर्द थमने का नाम नहीं ले रही. योगापट्टी क्षेत्र कभी मिनी चंबल के यूनिर्वसिटी के नाम से कभी कुख्यात रहा. सुशासन की सरकार में यहां विकास की रोशनी पहुंचने लगी. फिर भी प्रखंड मुख्यालय से मदारपुर डीही तक जानेवाली सड़क नहीं बनी. जबकि पूर्व के बाढ़ में यह तालाब में तब्दील हो चुकी है. 12 वर्ष से एक अदद सड़क का अभाव चिंताजनक है. इससे यहां के निवासियों के बेटे और बेटियों की शादी नहीं हो पा रही. बीमारों को अस्पताल पहुंचाने के लिए चारपाई ही सहारा मात्र है.
बच्चों को उच्च शिक्षा पाने में परेशानी है. एक तरह से यहां के लोग अपने प्रखंड और जिला मुख्यालय से कटे हुए हैं. आखिर इनका क्या कसूर है कि इस इलाका विशेष के लोग टापूनुमा जिंदगी जी रहे हैं. सबसे दर्द बयान किये, पर किसी ने नहीं सुनी. इससे आजिज दर्जनों गांवों के लोगों ने रविवार को जमकर उग्र प्रदर्शन किये. उनका कहना था कि इस सड़क निर्माण के लिए वे प्रशासनिक पदाधिकारियों से लेकर विधायक, सांसद तक गुहार लगा चुके हैं. इस सड़क को सीएम नीतीश कुमार भी देख चुके हैं. परंतु पता नहीं वे कैसे इसे भूल गये? यह सड़क सभी के नजरों से ओझल है.
डीही-भटवलिया सड़क पांच जगहों पर गड्ढों में तब्दील : प्रखंड मुख्यालय से ननकार और भटवलिया होते हुए मदारपुर डीही जाने वाली सड़क आज तक नहीं बन पायी. कारण यह कि पूर्व की बाढ़ में डिही-भटवलिया सड़क पांच जगहों पर टूटी है. वह भी 40 फीट लंबा और 20 फीट गहरा टूटी है. जिससे सड़क तालाब में तब्दील हो गयी है.
समाहरणालय पर घेराव व प्रदर्शन की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों में सलार मियां, बाबूनंद शर्मा, जयनाथ पांडेय, एजाज अंसारी, नथुनी यादव, दिनेश मुखिया, कयामत अंसारी, वकील अंसारी, बद्री बैठा, आधार यादव, विपत यादव, नजामुद्दीन अंसारी, सेराजुद्दीन अंसारी आदि सैकड़ों ग्रामीण शामिल रहे. इन लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के अंदर इनके समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो ये जिला समाहरणालय पर घेराव और प्रदर्शन करेंगे.

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