अपने ही फैसले को पलटा
बेतिया : अपने अजब-गजब कारनामे से जिले में अलग पहचान बना चुके शिक्षा महकमा के एक नये फैसले ने फिर से उसे चर्चा में ला खड़ा किया है. ताजा मामला मझौलिया प्रखंड के एक मध्य विद्यालय से जुड़ा हुआ है. जहां जिला शिक्षा पदाधिकारी के एक साल पूर्व फैसले को पलटते हुए दो सदस्यीय जांच टीम ने दोषी शिक्षक को क्लीन चिट दे दिया है.
उक्त विद्यालय का औचक निरीक्षण जिला कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा छह अगस्त 15 को किया गया था. जांच के दौरान उपस्थिति पंजी में दर्ज छात्रों की संख्या का भौतिक सत्यापन किये जाने पर 69 छात्र कम मिले थे. विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक भी बिना सूचना अनुपस्थित मिले थे. विद्यालय का अभिलेख भी उस वक्त प्रस्तुत नहीं किया गया था.
फैसला बना शिक्षकों में चर्चा का विषय
विद्यालय के एक सहायक शिक्षक भी अनधिकृत रूप से गायब मिले थे. डीपीओ की जांच रिपोर्ट के बाद डीइओ ने विद्यालय में अनियमितता और एमडीएम में गड़बड़ी मानते हुए प्रभारी प्रधानाध्यापक सहित सभी सहायक शिक्षकों को दोषी माना था और उनपर कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन मामले में कार्रवाई नहीं होने पर विद्यालय के ही एक शिक्षक की ओर से डीइओ को अभ्यावेदन दिया गया. जिसके बाद डीइओ की ओर से करीब एक साल बाद दो सदस्यीय जांच टीम गठित कर मामले की जांच का निर्देश दिया गया.
िशक्षक संघ का दबाव !
जांच दल में डीपीओ लेखा योजना डाॅ विमल ठाकुर व कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना नासिर हुसैन ने 17 नवंबर 16 को जांच की. जांच टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट में संबंधित प्रभारी प्रधानाध्यापक को क्लीन चिट दे दी है. जिसके बाद यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. क्योंकि मझौलिया प्रखंड के ही एक उच्च विद्यालय में करीब इसी प्रकार हुए एक मामले में संबंधित शिक्षक पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है. ऐसे में शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जांच रिपोर्ट संदेह के घेरे में है. शिक्षा महकमें से जुड़े लोगों की मानें तो इस मामले में शिक्षक संघ का दबाव काम कर रहा है.
िशक्षा विभाग का कारनामा
मझौिलया प्रखंड के एक म. विद्यालय का मामला
जांच रिपोर्ट पर उठी उंगली
