बदहाली. बगहा रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का अभाव
निरीक्षण के एक दिन पूर्व लगे थे छह पंखे
शुद्ध पेयजल के लिए लगाये गये बूथ से नहीं मिलता पानी
सफाई व्यवस्था की स्थिति बदतर
बगहा : रेल अधिकारियों के आगमन पर चमकने वाला रेलवे स्टेशन उनके जाते हीं कचरों से भर जाता है. स्टेशन की व्यवस्था अधिकारियों के आगमन के समय तो बिल्कुल ठीक रहती है लेकिन उनके जाने के साथ हीं पूरी तरह ध्वस्त हो जाती है. यहां तक की प्लेटफॉर्म पर लगे पंखे भी डीआरएम के आने पर हीं चलते हैं. पिछले सप्ताह मंडल रेल प्रबंधक जब बगहा स्टेशन का निरीक्षण करने पहुंचे तो स्टेशन की साफ-सफाई देखकर ऐसा लगता था कि यहां कभी गंदगी थी हीं नहीं. उसके एक दिन पहले बगहा स्टेशन पर छह नये पंखे लगाये गये थे. जो चल भी रहे थे. लेकिन उनके जाने के साथ हीं स्टेशन पर गंदगी का अंबार लग गया. पंखे चलने भी बंद हो गये.
नहीं है पेयजल की व्यवस्था: बगहा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रुकते हीं रेल यात्रियों को पानी के लिए दौड़ लगाते हुए देखा जा सकता है. वैसे तो प्लेटफॉर्म संख्या एक पर पेयजल के लिए पांच प्वाइंट लगाये गये हैं.
लेकिन इसमें भी अधिकतर नल खराब पड़े हैं. कभी इसमें पानी होता है तो कभी नहीं होता. रेल प्रबंधन की ओर से लगभग तीन महीना पूर्व सभी स्टेशनों पर आर ओ से पानी देने के लिए बूथ लगाये गये.
उसी क्रम में बगहा में भी आर ओ के तीन बूथ लगाये गये. लेकिन ये बूथ हमेशा बंद रहते हैं. ये लगने के साथ हीं बंद पड़े हैं.
अंधेरा व गंदगी से जूझते हैं रेल यात्री: रेल यात्री प्रति दिन स्टेशन पर अंधेरा एवं गंदगी से जूझते हैं. प्लेटफॉर्म के दोनों किनारों पर लाइट की व्यवस्था नहीं है. प्लेटफॉर्म एक से लेकर दो तक गंदगी का अंबार लगा है.
प्लेटफॉर्म के उपर दो बड़े-बड़े पेड़ हैं जिस पर कौओं ने घोंसला बना रखा है. वे सारे दिन गंदगी फैलाते हैं. उनके बीट से प्लेटफॉर्म पर बैठना या खड़ा होना भी मुश्किल है. जब भी कोई रेल यात्री धूप से बचने के लिए पेड़ के नीचे जाता है. कौए उपर से बीट कर देते हैं. कौओं के बीट के चलते आप स्टेशन पर लगे बेंच पर बैठ नहीं सकते.
