बेतिया : जिला परिषद जिले में त्रिस्तरीय पंचायती राज का सबसे बड़ा सदन है. इसके बावजूद इसकी सरकारी उपेक्षा आम लोगों के समझ से परे है. हद तो यह कि वर्तमान में जिला परिषद कार्यालय के 110 पदाधिकारियों व कर्मियों के सृजित पदों में महज छह ही कार्यरत हैं. इनके भरोसे ही इतने महत्वपूर्ण कार्यालय का संचालित हो रहा है.
सनद रहे कि इस कार्यालय के शेष बचे छह कर्मी भी वर्ष 2021 में अवकाश ग्रहण कर जायेंगे और यदि समय रहते यहां खाली भारी भरकम पदों को नहीं भरा गया तो यह कार्यालय पदाधिकारी व कर्मीविहीन हो जायेगा. जानकारी के अनुसार जिला परिषद में जिला अभियंता का पद भी प्रभार में है. इसी तरह सहायक अभियंता के दो पद, कनीय अभियंता के तीन पदों के अलावा, प्राक्कलन, दो ड्राइवर, अमीन समेत अन्य कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं.
सात चिकित्सकों में से महज एक चिकित्सक कार्यरत हैं. 19 कलर्क के पदों में से वर्तमान में चार ही कार्यरत हैं. इसी तरह पिउन के 40 पदों में से दो पिउन बच गये, शेष सभी पद खाली चल रहे हैं. आश्चर्य नहीं कि पदाधिकारियों व कमिर्यों के अभाव में विगत 2000 से बगहा स्थित जिप का कार्यालय बंद चल रहा है.
जबकि वर्ष 2000 के पहले यहां 13 कर्मियों व सहायक अभियंता के नेतृत्व में कार्यालय संचालित होता था. नौतन प्रखंड के क्षेत्र संख्या-36 से जीते सबसे पुराने पार्षद मोबिन अहमद उर्फ पप्पू बताते हैं कि जब वे वर्ष 2001 में पहली बार जिला पार्षद चुन कर आये थे, उस वक्त भी जिले के कुल 42 पार्षदों के बराबर 42 कर्मी यहां कार्यरत थे. जिला पार्षद विनय कुमार शाही व सफीउद्दीन उर्फ टेनी ने कहा है कि उपेक्षा सर्वविदित है.
