पर्चा व सिलिंग की भूमि खरीद-बिक्री की होगी जांच

बेतिया : सदर अंचल में पर्चाधारी व सिलिंग की सैकड़ों एक भूमि की खरीद-बिक्री के मामले की जांच करायी जायेगी. इसके लिए अपर समाहर्ता नंदकिशोर साह ने बेतिया सदर अंचल के अंचलाधिकारी से प्रतिवेदन की मांग की है. बताते हैं कि इस मामले में आधा दर्जन से ज्यादा अधिकारी, कर्मी व क्रेता-विक्रेता फंस सकते हैं. […]

बेतिया : सदर अंचल में पर्चाधारी व सिलिंग की सैकड़ों एक भूमि की खरीद-बिक्री के मामले की जांच करायी जायेगी. इसके लिए अपर समाहर्ता नंदकिशोर साह ने बेतिया सदर अंचल के अंचलाधिकारी से प्रतिवेदन की मांग की है. बताते हैं कि इस मामले में आधा दर्जन से ज्यादा अधिकारी, कर्मी व क्रेता-विक्रेता फंस सकते हैं.

उन पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. एडीएम नंदकिशोर साह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला निबंधन पदाधिकारी व बेतिया सीओ से रिपोर्ट तलब किया है. जिला प्रशासन की सख्ती के बाद हड़कंप मचा है. बताते हैं कि बेतिया अंचल के बैद्यनाथपुर, पिपरा-पकडी, अहवर मझरिया सहित अन्य मौजे के सैकड़ों एकड भूमि की खरीद बिक्री की गयी है.

इसमें से अधिकांशभूमि सिलिंगवाली है या गरीबों भूमिहीनों को पर्चेवाली. बैद्यनाथपुर मौजा के ही खाता संख्या-136, खेसरा संख्या-01 को बिहार सरकार ने अधिशेष भूमि घोषित किया. इस संबंध में 9 मार्च 1987 को बिहार सरकार ने गजट भी प्रकाशित कर दिया था कि उक्त भूमि सिलिंग एक्ट के तहत अधिशेष घोषित कर दी है. जब पर्चाधारी व सिलिंग भूमि घोषित हो जाती है,तो ऐसे में नियमों के अनुसार उक्त भूमि की ना तो बेचा जा सकता है व ना ही खरीदा जा सकता है. इतना ही नहीं पर्चाधारी व सिलिंग की भूमि की रजिस्ट्री भी नहीं हो सकती है.

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