वाल्मीकिनगर में पार्टी व विरासत के बीच जंग

गणेश वर्मा सामाजिक व जातीय समीकरण को साधने की कोशिश वाल्मीकिनगर(बेतिया) : 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आयी वाल्मीकिनगर लोकसभा सीट पर इस बार उम्मीदवार नहीं, बल्कि पार्टी और विरासत के बीच जंग है. एनडीए से जदयू के टिकट पर लड़ रहे वैद्यनाथ महतो को जहां अपनी पार्टी से उम्मीद है, वहीं […]

गणेश वर्मा
सामाजिक व जातीय समीकरण को साधने की कोशिश
वाल्मीकिनगर(बेतिया) : 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आयी वाल्मीकिनगर लोकसभा सीट पर इस बार उम्मीदवार नहीं, बल्कि पार्टी और विरासत के बीच जंग है. एनडीए से जदयू के टिकट पर लड़ रहे वैद्यनाथ महतो को जहां अपनी पार्टी से उम्मीद है, वहीं पहली बार चुनावी मैदान में उतरे कांग्रेस के शाश्वत केदार को अपने पुरखों के राजनीतिक विरासत का सहारा है. शाश्वत पूर्व मुख्यमंत्री केदार पांडेय के पौत्र और पूर्व सांसद मनोज पांडेय के बेटे हैं और चुनाव प्रचार में उन्हें इसी रूप में प्रोजेक्ट भी किया जा रहा है.
यहां से सांसद भाजपा के सतीशचंद्र दूबे टिकट न मिलने से नाराज चल रहे थे और उन्हें मनाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को पहल करनी पड़ी. वैद्यनाथ इस चुनाव में मोदी-नीतीश के चेहरे के जरिये 2009 जैसा रिजल्ट चाहते हैं तो शाश्वत अपने विरासत के भरोसे साल 1984 से पहले वाले दौर को लौटाने की फिराक में हैं. हालांकि, इससे इतर यहां के मतदाता खुलकर नहीं बोल रहे हैं. 2009 के चुनाव में निर्दलीय फखरुद्दीन को 1 लाख 56 हजार 625 मतों के भारी अंतर से हराकर संसद पहुंचे वैद्यनाथ महतो 2014 के चुनाव में महज 81 हजार 612 वोट लेकर तीसरे नंबर पर आ गये थे.
एनडीए ने झोंकी ताकत वाल्मीकिनगर सीट को
अपने पाले में लाने के लिए एनडीए ने पूरी ताकत झोंक दी है. बीते छह दिनों में मुख्यमंत्री की पांच चुनावी सभाएं हो चुकी हैं. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा भी रामनगर में हुई है. सुशील मोदी भी यहां दो सभाएं और एक रोड शो कर चुके हैं. वहीं महागठबंधन से लौरिया में तेजस्वी यादव और जीतनराम मांझी की एक सभा हुई है.
मतदाता मौन, उम्मीदवार मुखर
बगहा शहर के नारायणापुर गोला घाट. दोपहर के बगीचे में बैठकर कुछ लोग चर्चा कर रहे हैं. बात चुनाव पर चली तो एक ने कहा, इस बार पार्टियों ने प्रत्याशियों का चयन ठीक से नहीं किया.
75 वर्ष से ज्यादा उम्र वालों को टिकट नहीं मिलने का नियम बन जाना चाहिए. चर्चा के दौरान यह भी बात उठी कि न चाहते हुए भी केंद्र की राजनीति व देश के विकास को देखते हुए हम लोगों को न चाहने वाले प्रत्याशी को भी वोट देना मजबूरी बन जाती है. इसी दौरान अशोक राम ने कहा कि अगर विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रत्याशी नहीं होगा तो उस पार्टी को हम वोट नहीं देंगे.
ब्राह्मण और यादव वोटों पर दारोमदार : वाल्मीकिनगर में इस बार राजद के एमवाइ (मुस्लिम-यादव) समीकरण में बसपा के दीपक यादव सेंधमारी की कोशिश कर रहे हैं. वैसे यहां उसे ही जीत िमलेगी, जिसे ब्राह्मण और यादव समाज का वोट मिलेगा.

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