बढ़ीं जरूरतमंदों की मुश्किलें
सरिसवा. आरटीपीएस कर्मियों के हड़ताल के कारण मझौलिया प्रखण्ड क्षेत्रों से आवेदन जमा करवाने आये लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. केवल अंचल कार्यालय के जमाबंदी डाउन लोडिंग कर्मी ही कार्य कर रहे हैं. बहरहाल आय, जाति, निवास, एलपीसी, बृद्धावस्था पेंशन के लिये प्रखण्ड क्षेत्र के दूर दूर से आये आवेदनकर्ता थक हार घर वापस होने को विवश हैं. वही आवेदनकर्ताओं में ज्ञांति देवी, पम्मी कुमारी, इम्तेयाज आलम, संतोष पासवान, दीपक सहनी, जनक प्रसाद, संदीप कुमार, रागनी कुमारी, रामबाबू कुमार सहित दर्जनों आवेदनकर्ताओं का कहना था कि प्रखण्ड क्षेत्र के सुदूर गांव से सौ से दो सौ रुपये भाड़ा देकर प्रखंड मुख्यालय आये थे.
यहां पर पता चला कि आरटीपीएस के सभी कर्मी हड़ताल पर गये हैं. वही छात्राओं का कहना था कि जाति, निवास और आय प्रमाणपत्र विद्यालयों में देना है. लेकिन हड़ताल के कारण उनकी समक्ष आ खड़ी हुई है. बताते चलें कि समान काम समान वेतन को लेकर आरटीपीएस कर्मी जिला मुख्यालय पर हड़ताल पर बैठे हैं.
मोतिहारी में तीन नक्सली गिरफ्तार
राजेपुर के नवादा चिमनी पर
आये थे लेवी की रकम लेने
गिरफ्तार एक नक्सली पकड़ीदयाल चैता का निवासी
लेवी का परचा, रसीद, देसी पिस्टल व कारतूस बरामद
शिवहर का खैरवा गांव बना नक्सलियों का आश्रय स्थल
सोशल मीडिया पर सज रही मिथिलाक्षर की पाठशाला
90 दिनों के पाठ्यक्रम के 55 वीडियो यू-ट्यूब पर उपलब्ध
30 व्हाट्स एप ग्रुप के माध्यम
से दिया जा रहा प्रशिक्षण
15 से 20 व्यक्ति प्रत्येक सप्ताह
हो जाते हैं जानकार
राजनीति से दूर रह कर युवा
ला रहे बदलाव
सौराठ के अजय नासिक से
करते हैं मॉनीटरिंग
इस तरह से शुरू हुआ अभियान
अबतक बन चुके 30 व्हाट्स एप ग्रुप का पर्यवेक्षण मिथिलाक्षर में प्रवीण हो चुके विशेषज्ञ करते हैं. नया ग्रुप बनाये जाने पर सबसे पहले उस पर मिथिलाक्षर की हार्ड कॉपी, फेसबुक लिंक, यू ट्यूब पर डाले गये कोर्स मैटेरियल आदि अपलोड कर दिये जाते हैं. ग्रुप में सदस्यों की संख्या 30 रहती है. निष्क्रिय होने पर सदस्यों को हटाकर नये सदस्य रख लिये जाते हैं. 90 दिनों में तीन परीक्षा पास कर लोग मिथिलाक्षर में प्रवीण हो जाते हैं. फिर प्रवीण हो चुके लोग नया ग्रुप बनाकर लोगों को उससे जोड़ने के कार्य को आगे बढ़ाते हैं.
शुरू में लोग मिथिलाक्षर की छवि को देखकर ही घबरा जाते थे. उन्हें लगता था कि इसे सीखना काफी कठिन है. ऐसे में वीडियो के माध्यम से अक्षरों को लिखकर सिखाने से न सिर्फ लोगों को यह सुलभ लगने लगा, बल्कि इसके प्रति रुचि जगने लगी.
अजयनाथ शास्त्री
