बिहार 21 मार्च को 106 साल का हो जायेगा. राज्यवासियों के लिए यह गौरव की बात है. प्रभात खबर ने बिहार दिवस के मौके पर अतीत, पुराने गौरव, शिक्षा, स्वस्थ्य और महिला सशक्तीकरण की दिशा में हुई पहल पर विशेष परिचर्चा का आयोजन किया है. जिला मुख्यालयों में 21 मार्च तक परिचर्चा होगी, िजसमेंं सभी की भागीदारी होगी. इससे समाज में एक नया संदेश जायेगा
शिक्षा, अधिकार और विकास से हासिल होगा बिहार का गौरव
बिहार 21 मार्च को 106 साल का हो जायेगा. राज्यवासियों के लिए यह गौरव की बात है. प्रभात खबर ने बिहार दिवस के मौके पर अतीत, पुराने गौरव, शिक्षा, स्वस्थ्य और महिला सशक्तीकरण की दिशा में हुई पहल पर विशेष परिचर्चा का आयोजन किया है. जिला मुख्यालयों में 21 मार्च तक परिचर्चा होगी, िजसमेंं सभी […]

बेतिया : यह माह बिहारियों के लिए गर्व का माह है. हम 106 साल के हो चुके बिहार में प्रवेश कर रहे हैं. सभी इसे अपने-अपने ढंग से मनाने में जुटे हैं. सरकार इसे मद्य निषेध अभियान व चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष को समर्पित कर रही हैं. जो चंपारण के लिए अभिभूत करने वाली है. इससे इतर ‘प्रभात खबर’ भी इस दिवस के बहाने समाज के सभी वर्गों से एक विकसित, समृद्ध, खुशहाल और गौरवशाली बिहार के परिप्रेक्ष्य में उनके विचार, सलाह, संदेश और राय जानने का प्रयास कर रहा है.
शुक्रवार को ‘प्रभात खबर’ कार्यालय में ‘कैसे हासिल होगा बिहार का गौरव’ विषय पर आयोजित इस परिचर्चा में वक्ताओं ने जहां बदलते और बढ़ते बिहार की खुबियों की सराहना की, वहीं कमियों पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी. कहा कि बिहार का स्वरूप बदला है. विकास की रोशनी फैली है. कई स्तरों पर बिहार का नाम अंतरराष्ट्रीय फलक तक पहुंचा है. यह बदलते बिहार की दास्तां ही तो है कि बिहार ने मद्य निषेध, मानव शृंखला, बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसे कार्य जनचेतना के सहारे कर दिया.
यह बिहारियों की क्षमता दर्शाती है और बदलते बिहार में उनकी भागीदारी भी बताती है. परिचर्चा में मौजूद वक्ताओं के विचार भले ही भिन्न-भिन्न थे, लेकिन सभी के विचारों में यही संदेश था कि बिहार अपने उस गौरवशाली इतिहास को हासिल करने में लगी है. जरूरत है तो बस सभी के साझा प्रयास की.
प्रभात खबर परिचर्चा में बुद्धिजीवियों ने साझा
किये अपना अनुभव
पर्यटन स्थलों का भी हो विकास
महिलाओं को जोड़कर ही हो
सकती है गौरव की बात
हम जिस गौरवशाली बिहार की कल्पना कर रहे हैं, वह तभी हासिल होगा जब हम नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करते हुए उसमें महिलाओं की भागीदारी के बारे में सोचें. रानी लक्ष्मीबाई से लेकर साइना नेहवाल और अरूणधति जैसे तमाम उदाहरण आज हमारे सामने हैं, जो उस गौरव को हासिल करने में न सिर्फ प्रयास करती दिख रही है, बल्कि लौटा भी रहीं है. ऐसे में महिलाओं की भागीदारी करके ही हम उस अतीत को फिर प्राप्त कर सकते हैं.
सुरैया शहाब, मानवाधिकार एक्टिविस्ट
सार्थक है बिहार जागे…
देश आगे का संदेश
पतन होने में तो वर्षों लगे हैं तो उत्थान में भी समय निश्चित ही लगेगा. हमें अपना-अपना काम करते रहना होगा. तब जाकर बिहार के इतिहास की गाड़ी को वर्तमान में चलाते हुए भविष्य में दौड़ाया जा सकेगा. हम सबसे अच्छे भले न हो, लेकिन किसी से कम भी नहीं है. बस जरूरत है निश्चय करके कदम आगे बढ़ाने की और बिहार में वह क्षमता है जो विविधिता में भी एकता का सबसे अच्छा उदाहरण बनते हुए देश का ताज बन सकती है.
डॉ. एसके शुक्ला, विभागाध्यक्ष अंग्रेजी