हमारे बाजार. आधुनिक बहुमंजिली बाजार की आस में टूट रही नया बाजार की सांस
नया बाजार पर अतिक्रमणकारियों जुआड़ियों, शराबियों व का कब्जा
बेतिया : आधुनिक बहुमंजिली बाजार की आस में ऐतिहासिक गांधी बाजार सह नया बाजार की सांसे टूटने लगी है. नगर परिषद के अधीन संचालित यह बाजार पहले राजनीति और अब लालफीताशाही व तोताचश्मी का शिकार होकर रह गया है. वर्तमान में 20 से अधिक अतिक्रमणकारियों का कब्जा है. शाम होते ही इसके परिसर पर छत पर जुआड़ियों, अपराधियों, शराबियों का बाजार कायम हो जाता है. वे इसे रोज गंदा करते हैं. लेकिन साफ-सफाई, बिजली, पेयजल समेत सुरक्षा व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी की दिलचस्पी नहीं हुई. इस बाबत पूर्व पार्षद आनंद सिंह के आवाज बुलंद करने से नप बोर्ड ने नये भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव स्वीकृत कर दी. लेकिन इसे बनाने के लिए राजनेता, प्रतिनिधि या नप प्रशासन के पदाधिकारी पहल नहीं कर रहे.
वर्तमान में इसके परिसर में गंदगी का अंबार लगा है. वर्तमान पार्षद सीमा देवी व पूर्व पार्षद आनंद सिंह के सहयोग से शौचालय तो बनकर तैयार है. लेकिन बिजली, पेयजल, नाली व अन्य तरह की सुविधाएं नहीं हैं. एकमात्र चापाकल के सहारे सभी दुकानदार हैं. इससे इसमें दुकान चलाने वाले अधिकतर गरीब व मध्यम वर्गीय व्यवसायी ग्राहकों की कमी से बेहद चिंतित हैं. उल्लेखनीय है कि इस बाजार का उद्देश्य ब्रिटिश सामानों का वहिष्कार व स्वदेशी निर्मित वस्तुओं को बढ़ावा देना था. तब यह झोपड़ियों में संचालित हुई और स्वदेशी आंदोलन में जनसमर्थन से बाजार जम गया. बाद में नगरपालिका के अधीन हुई और 1980 के दशक में इसका पक्कीकरण हुआ. लेकिन इसकी दुकानें कई बड़े व्यवसायियों को दे दिये गये और वे दुकानों को गोदाम बना दिये. जिससे यह ऐतिहासिक व स्वदेशी बाजार टूट-सा गया.
फैक्ट फाइल
84 से अधिक दुकान हैं गांधी बाजार सह नया बाजार में
लाखों का रोज होता है कारोबार
सभी तरह की सामान मिलते हैं यहां
कल पढ़े बाजार समिति की समस्या
प्रभात खबर हमारे बाजार अभियान के तहत प्रभात खबर की टीम बुधवार को बाजार समिति में रहेगी. वहां की समस्याओं पर दुकानदारों से बातचीत होगी. बाजार से जुड़ी हुई आपकी भी कोई समस्या है तो हमे बताये. व्हाट्सएप करे. 8521544571
स्वदेशी आंदोलन के तहत बने लघु उद्योग बाजार
इसको स्थानीय स्तर पर हस्तशिल्प और खादी व अन्य तरह के लघु उद्योगों के बढ़ावा देने के लिए बाजार बनाया जा सकता है. जहां शहरी व ग्रामीण हस्तशिल्प से जुड़े ग्रामीण महिलाएं और पुरुष अपने तैयार सामान लाकर बेच सकते हैं. जरूरत है कि सरकार व प्रशासन के पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि इस दिशा में पहल करें.
डीएम व नप सभापति पर टिकी कायाकल्प की उम्मीद
शहर के बीच यह बाजार नप का एकमात्र भूमि है. यहां आधुनिक और बदलते समय के बहुमंजिली इमारत व उसमें हजारों दुकान बनाकर हस्तकला, शिल्प कला व लघु उद्योग के माध्यम से हजारों युवाओं को रोजगार दिया जा सकता है. नप को भारी राजस्व की प्राप्ति हो सकती है. यदि डीएम, नप सभापति, नप कार्यपालक पदाधिकारी के स्तर से बाजार के भवन निर्माण में पहल हो तो ऐतिहासिक बाजार को जीवंत कर सकते हैं.
बोले व्यवसायी
पूर्व नप पार्षद आनंद सिंह का कहना है कि उन्होंने प्रयास कर इसके भवन निर्माण की स्वीकृति करा दी है. इसका भवन निर्माण शीघ्र आरंभ की जाये. इसमें सबसे नीचे पोर्टिको, विवाह भवन का हाल, बाजार के लिए मॉल का हॉल बनाकर हजारों दुकानें लगायी जाये.
आनंद सिंह, पूर्व पार्षद
बाजार के क्षेत्र में कोई एटीएम या बैंक की शाखा नहीं है. यहां इसे स्थापित की जाये. ताकि दुकानदारों को पैसे जमा या निकासी के लिए इधर-उधर नहीं जाना पड़े.
राजू कुमार, दुकानदार
यदि बाजार के भवन का निर्माण कर सभी तरह की आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा दी जायें. इसके लिए डीएम, सभापति, कार्यपालक पदाधिकारी समेत अन्य जनप्रतिनिधियों भी को सार्थक पहल करना होगा.
सुमन कुमार, दुकानदार
मार्केट के अतिक्रमण हटाने और जुआ व शराब बंद कराने की दिशा में डीएम व एसपी के स्तर से पहल होनी चाहिए और साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था होनी चाहिए. ताकि दुकानदार और उनके हजारों परिवार के सदस्य अपने भविष्य व सुरक्षा के प्रति आश्वस्त हो सकें.
सत्यनारायण प्रसाद, दुकानदार
