बेतिया : आंगनबाड़ी केंद्रों पर रिक्त पदों पर वार्ड शिफ्टिंग के नाम पर खेल चल रहा है. वार्ड शिफ्टिंग के नाम पर सेविकाओं को परेशान भी किया जा रहा है. आलम यह है कि बिना पंचायत प्रतिनिधियों के आपत्ति या अनापत्ति के रिक्त केन्द्रों पर सेविकाओं का शिफ्टिंग चल रही है. परिणाम स्वरुप डीपीओ कार्यालय से लेकर जिलाधिकारी तक जिले के विभिन्न परियोजनाओं में कार्यरत आंगनबाड़ी सेविकांए समाहरणालय में दौड़ लगा रही हैं.पीडि़त आंगनबाड़ी सेविकाओं की मानें तो इस वार्ड शिफ्टिंग के मामले में पैसे का खेल पूरी तरह से खुल कर हो रही है.
वार्ड शिफ्टिंग के नाम पर चल रहा खेल, सेविकाएं परेशान
बेतिया : आंगनबाड़ी केंद्रों पर रिक्त पदों पर वार्ड शिफ्टिंग के नाम पर खेल चल रहा है. वार्ड शिफ्टिंग के नाम पर सेविकाओं को परेशान भी किया जा रहा है. आलम यह है कि बिना पंचायत प्रतिनिधियों के आपत्ति या अनापत्ति के रिक्त केन्द्रों पर सेविकाओं का शिफ्टिंग चल रही है. परिणाम स्वरुप डीपीओ कार्यालय […]

क्या है वार्ड शिफ्टिंग : बाल विकास परियोजना में जब आंगनबाड़ी सेविकाओं की बहाली हुई तो उन्हें वार्ड वार पदस्थापन नही कर टोला वार पदस्थापन कर दिया गया था. बहाली के बाद ये सेविकाएं टोलावार अपने केंद्रों का नियमित संचालन करती रही. इस बीच नये परिसीमन के बाद एक हीं वार्ड में दो -दो आंगनबाड़ी केंद्रो का संचालन होने लगा, तो कुछ वार्ड आंगनबाड़ी केंद्र बंद हैं.
संबंधित बंद केंद्रों के बच्चों के स्कूल पूर्व शिक्षा प्रदान करने एवं धात्री व किशोरी महिलाओं के उत्थान के लिए राज्य के बाल विकास परियोजना निदेशालय ने पत्र जारी करते हुए खाली पड़े वार्डों में केंद्रों के शिफ्टिंगका आदेश जारी किया. निदेशालय के पत्रांक 863 दिनांक 14 दिसंबर 2015 व पत्रांक 899 दिनांक 9 मार्च 2017 के आलोक में बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों ने वार्ड शिफ्टिंग का काम आंरभ किया,लेकिन इसी पत्र का हवाला देते हुए नियमों को ताक पर रखकर कतिपय परियोजना की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी ने जहां पूर्व से सरकारी भवन तैयार है वहां का या जहां पहले से केंद्र संचालित है. वहां अपने चहेते का नये सिरे से बहाली कराने के उदेश्य से वार्ड शिफ्टिंग को दरकिनार करते हुए वार्ड स्तर पर स्थानांतरण कर दिया गया है.
जिलास्तर पर पड़े है दर्जनों आवेदन : बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों द्वारा नियमों की कथित अनदेखी करते हुए वार्ड शिफ्टिंग के मामले को लेकर जिलास्तर पर दर्जनों मामले लंबित पड़े हुए है. जिसकी सुनवाई या जांच चल रही है.बावजूद संबंधित परियोजना की सीडीपीओ अपने मनमानी तरिके से रिक्त बनाये गये केंद्रो पर सेविका या सहायिका की बहाली के रिक्ति कीसूचना भी जिला को भेज दी गयी है.
जिला प्रोग्राम कार्यालय के आंकड़े बता रहे है कि वार्ड शिफ्टिंग से संबंधित आरोपो के 17 आवेदन जिला मुख्यालय को प्राप्त हुए है. जिनपर अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है.
रिक्त केंद्रों पर बिना पंचायत प्रतिनिधियों की आपत्ति व अनापत्ति के सेविका-सहायिकाओं को कर रहे हैं शिफ्ट
वार्ड शिफ्टिंग के मामले के आवेदन आ रहे हैं. संबंधित सीडीपीओ से प्रतिवेदन की मांग की गयी है. प्रतिवेदन मिलने के बाद ही मामलों का निष्पादन किया जा सकता है.
राजमोहन झा, प्रभारी जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, प़ चंपारण