टूटे घरों के मलबों को समेटने व टूटने वालों घरों से सामान हटाना रहा जारी
प्रशासनिक डंडे व हंटर के भय से बेघर अतिक्रमणकारियों का नहीं थमा दर्द
वीरानगी के बीच साफ झलक रहा अतिक्रमणकारी लोगों के चेहरे पर खौफ का आलम
बेतिया : कल तक जहां खुशहाली थी आज वहां तबाही व बर्बादी से चारों ओर खंडहर-सा मंजर पसरा हुआ है. यह हाल शहर के हजारी पशु मेला व डोलबाग स्थित बेतिया राज की भूमि की है. जहां पर घर बनाकर अतिक्रमण करने वालों ने खुशहाली में जी रहे थे. उनकी सारी खुशियां देखते देखते अभियान की आंधी में दफन हो गयी. लेकिन प्रशासनिक अभियान के दौरान कब्जा व अतिक्रमण हटाने के बाद आज वहां खंडहर-सा मंजर दिख रहा है. तोड़े गये घरों के नजारे एवं इस दौरान जमा हुए मलवों के ढेर से वीरानगी पसर गयी है
. प्रशासनिक डंडे व हंटर के भय से अतिक्रमणकारी लोगों के चेहरे पर खौफ का आलम है. इनमें से एक्का-दुक्का लोग टूटने वालों अपने घरों से सामान ढ़ोकर हटाने और कई लोग अपने घरों के मलवे में सामान ढूढते नजर आ रहे हैं. प्रशासनिक अतिक्रमण हटाओ अभियान के क्रम में बेघर हुए कई अतिक्रमणकारियों के परिजनों ने बताया कि भीषण ठंड के बीच रात भर वे अपने टूटे घरों के सामान की रक्षा रातभर जागकर करते रहे हैं. कई लोग तो तबाही व बर्बादी से अभी भी छाती पीटते नजर आ रहे हैं.
डोलबाग के तोड़े गये घरों में दो लोग सामान एकत्र करते मिले. जबकि कई लोग यहां से घर खाली कर अपने वाहनों पर सामान लादकर जाते हुए दिखे. रोकने पर डरते हुए कहने लगे कि वे यहां से अन्यत्र जा रहे हैं. यह घर तो एक दो दिन में तोड़ दिया जायेगा. ऐसे में वे अपने सामान को सुरक्षित ठिकाने पर रखने के लिए आये हैं. उनका कहना था कि प्रशासन की ओर से उनको कुछ दिनों की मोहलत दी गयी है. ऐसे में वे अपना सामान नहीं ले गये तो यह अभियान में बर्बाद हो जायेगा.
बिना पुनर्वास गरीबों को उजाड़ना प्रशासन की तानाशाही : बेतिया. राजद के वरीय नेता रणकौशल प्रताप सिंह ने विस्थापित लोगों को पुनर्वासित करने की बात कही है और बुलडोजर चलाने के काम पर तत्काल रोक लगाने की बात कही है. उन्होंने कहा है कि पूर्वी करगहिया पंचायत के डोलबाग में अतिक्रमण हटानेके नाम पर गरीबों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था किये उजाड़ने का काम किया जा रहा है. जबकि सन 2001-02 में तत्कालीन जिला समाहर्ता परमाररवि मनू भाई के द्वारा बाढ़ से कटाव पीडि़त आश्रय विहीन दलितो पिछड़ो को आश्रय लेने को इसी बस्ती में कहा गया था.
श्री सिंह ने जारी बयान में कहा कि 2001 के बाद सरकार द्वारा गरीबो दलितों के घर के कब्जेवाली भुमि की मापी भी कराई गई लेकिन बंदोबस्ती लीज अभी तक नहीं की गयी. खाता नं 2 खेसरा 317 जिसपर दलित परिवार बसे है. मेला ग्राउण्ड से अलगयह बकास्त भूमि है. ऐसा बताया जा रहा है. ऐसी भूमि पर बसे लोगों पर कार्यवाही से पहले सरकारको अन्य विकल्प तलाशना चाहिए. सरकार द्वारा 17 अप्रैल 2010 में राज्य महादलित आयोग के अध्यक्ष रामचंद्र राम सेजांच कराकर इस बस्ती को उजाड़ने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की सिफारिश कीगयी थी. इसके बाद दलितों ने अपना पेट काटकर अपने लिये घर बनाना शुरु किया. इस बस्ती में
सरकार की सड़क शौचालय बिजली शौचालय सहित सभी सुविधायें प्रदान की गई है. उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में दलितो गरीबों की बस्ती यदि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किये वर्तमान सरकार के द्वारा बुलडोजर चलचाना ठीक नही है. उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो राजद विरोध करेगी.
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