लौरिया : गरीबी क्या होती है और गरीबी में आदमी क्या कर सकता है ? यह कोई लौरिया मिश्र टोला के उस नन्हू राम से जाकर पूछे, जिसने अपने पैर के इलाज के लिए अपने उस कंधे के सहारे को बेच दिया, जो बुढ़ापे की लाठी बनता. उस बूढ़ी दादी फूलमति देवी से जाकर जाने, जिनके अपने बेटे को बचाने के लिए पोते को खुद से अलग कर देना स्वीकार कर लिया.
घर में अब मातम पसरा हुआ है. किसी को कुछ नहीं सूझ रहा है कि क्या करें. ग्रामीण भी यह जानने के बाद हतप्रभ है. इस वाकये ने सबको झकझोर कर रख दिया तो वहीं मानवता को भी शर्मसार कर दिया है. ग्रामीणों ने बताया कि नन्हू का परिवार बेहद ही गरीब है. घर में खाने तक के लाले हैं. एक माह पहले ही नन्हू की पत्नी लालसा देवी की भी मौत हो गई थी. वह भी किसी बीमारी से पीड़ित थी, लेकिन समुचित इलाज नहीं मिलने के चलते उसकी मौत हो गई. इतना ही नहीं कुछ दिन पहले नन्हू के बहन की भी बीमारी से ही मौत हो गई थी. इधर, नन्हू के पैर में घाव हो जाने के बाद उसने पूरी तरह से बिस्तर पकड़ लिया था.
पत्नी की मौत के बाद उसके सात माह के बेटे के पालने की जिम्मेवारी नन्हू की मां फुलमति देवी ने उठा लिया. फूलमति देवी गांव के लोगों से पैसे मांगकर एक तरफ नन्हू का गांव के ही डॉक्टरों के पास इलाज करवाती थी और पोते का भी ख्याल भी रखती थी. बाद में जब नन्हू को बेतिया में इलाज के लिए भरती कराया गया तो इलाज के लिए मासूम बेटे को बेचने में यह तनिक भी नहीं हिचके और डील होते ही मासूम को बेच दिया.
पत्नी की चिता को आग तक नहीं दे सका था नन्हू : पैर में घाव होने के बाद नन्हू की जिदंगी नरक बन सकी थी. वह दिन-रात दर्द से तड़पता रहता था. कोई उसके पास जाने तक को राजी नहीं होता था. बूढ़ी मां फूलमति देवी उसका देखभाल करती थी. घाव इतना बढ़ गया था कि नन्हू ने बिस्तर पकड़ ली थी. पत्नी लालसा देवी भी बीमारी के चलते अपने मायके चली गई थी. करीब एक माह पूर्व मायके में नन्हू की पत्नी की भी मौत हो गयी. लेकिन नन्हू अपने पैर में घाव के चलते अपनी पत्नी की चिता को आग तक देने नहीं जा सका.
मासूम बेटे को बेचे जाने का मामला, मायके में ही इजात के दौरान हो गई थी नन्हू की पत्नी लालसा की मौत
मां फुलमति देवी बेटे व पोते का रखती थी ख्याल
