बेतिया : कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े शातिर बबलू दूबे की गोली मार हत्या के मामले के अभियुक्त राणा प्रताप उर्फ राणा सिंह की गिरफ्तारी में बेतिया पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी.
यूं तो पुलिस को राणा सिंह की तलाश बम विस्फोट, मर्डर व रंगदारी के कई कांडों में थी, लेकिन बबलू दूबे की हत्या में इसका नाम आने के बाद बेतिया पुलिस राणा सिंह को दबोचने के लिए पूरी सरगरमी से जुट गई. जगह-जगह मुखबिरों और गुप्तचरों को सक्रिय कर दिया गया. गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर दी गयी और राणा सिंह के घर के अलावे सगे-संबंधी और रिश्तेदारों पर भी खुफिया पहरा बैठा दिया गया. नतीजा पुलिस का यह प्लान सफल रहा और अपने एक रिश्तेदार से मिलने पहुंचे राणा सिंह को पुलिस ने रिश्तेदार के साथ ही धर दबोचा.
सोमवार को मामले का खुलासा करते हुए एसडीपीओ संजय झा ने बताया कि पूर्वी चंपारण जिले के पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र के थरबिटिया गांव निवासी राणा प्रताप उर्फ राणा सिंह व नौतन थाना क्षेत्र के श्यामपुर कोतराहा निवासी संतोष राव को नगर के इमली चौक से पुलिस ने दबोच लिया. मौके से एक कट्टा और तीन कारतूस भी बरामद किये गये.
एसडीपीओ ने बताया कि एसपी विनय कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि अपराधी राणा सिंह बेतिया आने वाला है और किसी भीषण घटना को अंजाम देने की तैयारी में है. खबर पर एसपी विनय कुमार ने पुलिस टीम का गठन किया. इसमें नगर थाना समेत मोतिहारी पुलिस को शामिल किया गया.
इन पदाधिकारियों की टीम ने जाल बिछाकर शातिर राणा सिंह को हथियार के साथ दबोच लिया. इसमें दारोगा विमलेंदु कुमार, नगर थानाध्यक्ष नित्यानंद चौहान, दारोगा मुन्ना कुमार समेत अन्य शामिल रहे.
टाटा मोटर्स पर बम विस्फोट कर की थी अपराध की शुरुआत : एसडीपीओ ने बताया कि राणा सिंह ने चार वर्ष पूर्व यह अपराध की दुनिया में प्रवेश किया. इस क्रम में टाटा मोटर्स पर बम विस्फोट के मामले में पुलिस ने उसे पकड़कर जेल भेज दी थी. उसके बाद इसने कई जघन्य कांडों को अंजाम दिया. बूथ लूटने से लेकर बम विस्फोट व कई जघन्य कांडों में पुलिस को इसकी तलाश थी. वर्ष 2016 में पंचायत चुनाव के दौरान बूथ कब्जा को लेकर अपने गांव थरबिटिया में फायरिंग की थी. गांव के ही माधवलाल सहनी पर भी गोली चलाकर हमला किया.
जिसमें एक ग्रामीण अभिताभ सहनी की मौत हो गयी थी. पकड़ीदयाल में एके-47 से चार लोगों की हत्या कर दी थी. वहीं पकड़ीदयाल के नगर अध्यक्ष रहे मनोज कुमार व दो अन्य लोगों की हत्याकांड में भी इसकी संलिप्तता रही है. वहीं हरसिद्धी के व्यवसायी चिरकुट व विनय से तीस-तीस लाख की रंगदारी मांगी थी. चोरमा गांव के व्यवसायी अरूण केसरी से दस लाख की रंगदारी मांगने के मामले में भी इसका नाम आया है.
