बोलीं, शहर का विकास पहली प्राथमिकता, इससे नहीं होगा समझौता
चनपटिया : नगर पंचायत के नवनिर्वाचीत अध्यक्ष विमला देवी व उपाध्यक्ष अंशु बिहारी ने बुधवार को पदभार संभाला. इस अवसर पर नप कार्यालय को दुल्हन की तरह सजाया गया था. अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के कार्यालय पहुंचते ही नपकर्मियों ने दोनों का भव्य स्वागत किया और उन्हें बुके व फूल माला देकर सम्मानित किया. इधर नवनिर्वाचित नप अध्यक्ष विमला देवी ने पदभार संभालने के पश्चात पत्रकारों से कहा कि विकास उनकी पहली प्राथमिकता है.
उन्होंने कहा कि विकास को लेकर कोई समझौता नहीं होगा. एक प्रश्न के जवाब में कहा कि अध्यक्ष बनने में जो सहयोग किया और जो नहीं किया सब मेरी नजर में बराबर हैं. विकास में सबका सहयोग लिया जाएगा और चप्पे-चप्पे का विकास किया जायेगा. वहीं नप उपाध्यक्ष अंशु बिहारी ने कहा कि विकास से वंचित ग्रामीण क्षेत्र पर विशेष नजर रहेगा. नप के पकड़ीहार, उनका खुद का वार्ड शुक्ल टोला व टिकुलिया आदि वार्डों का कायाकल्प करने की कोशिश करूंगा.
परंपराओं का नहीं हुआ निर्वहन : किरण
नप की दो-दो बार अध्यक्ष रह चुकी वार्ड पार्षद किरण देवी ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित सभी पार्षदों को काम कार्य संभालने पर उन्हें बधाई दी हैं. साथ ही क्षोभ भी प्रकट किया है. किरण देवी ने कहा है कि नवनिर्वाचित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने परम्पराओं का निर्वहन नहीं किया और काम कार्य संभालने के मौके पर विपक्ष की भूमिका में रहे 06 पार्षदों को निमंत्रण नहीं दिया गया.
कार्यालय का सभापति ने किया निरीक्षण : सभापति गरिमा सिकारिया कार्यभार संभालने के बाद सांख्यिकी विभाग का निरीक्षण की. निरीक्षण के दौरान कार्यालय बंद मिला, तो अधिकारी गायब मिले. उसके बाद राष्ट्रीय आजीविका मिशन चेंबर में पहुंची. कर्मी व पदाधिकारी चुस्त-दुरुस्त मिले. उसके बाद सभापति सामान्य प्रशाखा, योजना प्रशाखा, स्थापना, कम्प्यूटर कक्ष व आगत-निर्गत प्रशाखाओं में पहुंची. वहां की व्यवस्था को देखी व उसमें सुधार करने का निर्देश दी.
गरिमा ने बढ़ाया पारिवारिक परंपरा का मान : नगर परिषद की राजनीति में एक और इतिहास जुड़ गया. उस कड़ी में गरिमा सिकारिया शामिल हो गयी हैं.साठ के दशक में बेतिया नगर परिषद के सभापति पद उनके दादा (ससुर) ब्रजेश लाल सिकारिया सभापति के पद पर काबिज हुए थे. उस समय संसाधनों के अभाव में भी वे अपने बेतहर कुशलता से नगर परिषद के विकास के लिए हर संभव प्रयास भी किये थे. उसमें वे बहुत हद तक सफल भी रहे थे. आज सिकारिया परिवार की तीसरी पीढ़ी दहलीज को पार कर गरिमा सिकारिया सभापति की कुर्सी पर विरजमान हुई हैं. उनसे भी शहर के लोगों को भी काफी अपेक्षायें हैं.
