बदहाली. एनएच- 527 डी की हालत दयनीय
सुगौली से रामगढ़वा व रामगढ़वा से वायरलेस टावर तक सड़क खराब
53 किलोमीटर मोतिहारी जाने में लग जाता है दो घंटे से अधिक समय
रक्सौल : पीपराकोठी से रक्सौल के बीच एनएच 527 डी की स्थिति काफी खराब हो चुकी है. इस पर लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं. एनएच के इस खंड पर सबसे अधिक खराब सड़क सुगौली से रामगढ़वा व रामगढ़वा से रक्सौल के बीच है. खराब सड़क के कारण लोग इस रूट से आना नहीं चाहते हैं.
इसका सबसे प्रमुख कारण यह है कि सड़क पर बने गड्ढे और खतरनाक डायवर्सन के कारण कब कौन सी गाड़ी फंस कर किसी गाड़ी पर पलट जाये इसका कोई ठीक नहीं है. अक्सर सुगौली से रक्सौल के बीच वाहनों के पलटने की खबरें आती रहती हैं. 2011 से एनएच 527 डी जो उस समय एनएच 28 ए हुआ करती था का निर्माण कार्य तांतिया कंस्ट्रक्शन लिमिटेड नाम की कंपनी कर रही थी. जिस सड़क को 2014 में ही बन जाना था वह सड़क 2017 के फरवरी तक नहीं बन सकी है. सड़क निर्माण कंपनी ने जिस तरीके से काम किया है कि उसके बाद यह सड़क चलने लायक नहीं रह गयी है. जहां पर काम पूरा किया गया है
वहां पर भी कई खामियां हैं. रामगढ़वा से सुगौली की ओर जाने के बाद बेला मुरला चौक पर बना डायवर्सन इतना खतरनाक है कि यहां पर अब तक तीन से अधिक मौत हो चुकी है और दर्जनों गाड़ियां पलट चुकी हैं.
राजस्व पर पड़ा असर : भारत से नेपाल को रेखांकित करने वाली इस अंतरराष्ट्रीय महत्व की सड़क की बदहाली का असर भारत के राजस्व पर भी पड़ा है. खराब सड़क के कारण ट्रांसपोर्टर रक्सौल बॉर्डर के रास्ते सामान नेपाल नहीं भेजना चाहते हैं. क्योंकि भारी वाहनों को रक्सौल आने में काफी दिक्कत होती है. इसका खामियाजा यह है कि जो लक्ष्य भारतीय सीमा शुल्क सदन को मिलता है उसकी प्राप्ति मुश्किल से हो पाती है. वहीं पर्यटक भी खराब सड़क के कारण इस रूट से नेपाल नहीं आना-जाना चाहते हैं. इस कारण स्थानीय व्यवसायियों व ट्रैवल एजेंटों को भी नुकसान होता है.
अंतरराष्ट्रीय महत्व की सड़क
भारत से नेपाल को जोड़नेवाली इस सड़क का अंतरराष्ट्रीय महत्व भी है. एनएच 527 डी के अलावा यह सड़क एशियन हाइवे 42 (एएच 42) भी है. जो कि हजारीबाग में एएच 2 से निकलकर नेपाल की सीमा से होते हुए चाइना तक जाती है. एएच 42 की हालत सबसे अधिक पूर्वी चंपारण में खराब है. वहीं यह सड़क नेपाल में जाने के बाद ठीक हो जाती है. यहां बता दें कि सड़क मार्ग विस्तार के लिए आपसी समझौते के बाद एशिया के देशों को जोड़ने के लिए एशियन हाइवे नेटवर्क बनाया गया था.
तांतिया का ठेका रद्द होने से जगी लोगों की उम्मीद
अब जबकि भारतीय राष्ट्रीय राज्य मार्ग प्राधिकरण के द्वारा सड़क निर्माण में अनियमितता व देरी को लेकर निर्माण कंपनी तांतिया कंस्ट्रक्शन का ठेका रद्द कर दिया गया है. ऐसे में लोगों में यह उम्मीद जगी है कि जल्द ही विभागीय स्तर पर इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो पायेगा. सड़क बनने के बाद रक्सौल के साथ-साथ आसपास के इलाके के लोगों को मोतिहारी व पटना जाने में होनेवाली असुविधा भी समाप्त हो जायेगी. हालांकि जिस तरह की पेंच कंपनी फंसा के गयी है कि वैसी स्थिति में यह कह पाना कि सड़क कब तक बन पायेगी मुश्किल लगता है.
प्रोजेक्ट पर एक नजर
प्रोजेक्ट का नाम : पीपराकोठी-रक्सौल टू लेन सड़क
निर्माण के लिए प्रस्तावित राशि : 375.90 करोड़
काम आरंभ की तिथि : 10 अक्तूबर 2011
सड़क की लंबाई : 68.591 किलोमीटर
बड़े पुलों की संख्या : आठ
छोटे पुल की संख्या : 32 (इसमें दह नया, छह पुन:निर्माण व तीन आरओबी शामिल हैं)
वर्तमान स्थिति : तांतिया से छिना काम, विभाग से होगा निर्माण
