बक्सर. जिले के सदर अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड में कर्मियों की काफी कमी झेलनी पड़ रही है. अस्पताल में दो नर्सिंग स्टॉफ के साथ ही एक डॉक्टर के सहारे कार्य करना पड़ता है. वहीं नर्सिंग स्टॉफ को मरीजोें के रजिस्ट्रेशन से लेकर इमरजेंसी में भर्ती मरीजों का इलाज तक करना पड़ता है. इस दौरान मरीजों की बीपी मापने, इंजेक्शन लगाने, पानी चढ़ाने के साथ ही इमरजेंसी में आने वाले कटे फटे मरीजों का टांका लगाने तक का कार्य सिर्फ नर्सिंग स्टॉफ को ही करना पड़ता है. जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है. सबसे विकट परिस्थिति तब होती है जब इमजरेंसी में एक्सिडेंट व अन्य गंभीर समस्याओं वाले मरीज आ जाते है. ऐसे में इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों के संपूर्ण इलाज के साथ ही एक्सीडेंट मरीजों को भी टेकल करना पड़ता है. उसे टांका देने से लेकर हर प्रकार का कार्य उन्हें करना पड़ता है. इससे काफी भागदौड़ व अफरा तफरी का माहौल कायम हो जाता है. इसके साथ ही एक से अधिक एक साथ एक्सीडेंटल मरीजों के पहुंचने पर स्थिति काफी गंभीर हो जाती है. इस दौरान सभी मरीजों को एक साथ इलाज दे पाना कठिन हो जाता है. इमरजेंसी में रजिस्ट्रेशन के लिए कोई कर्मी नहीं दिया गया है. इससे कभी भी अनहोनी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. स्टॉफ नर्स ग्रेड वन का कार्य : स्टाफ नर्स ग्रेड वन का प्राथमिक कार्य मरीजों को उच्च-गुणवत्ता वाली प्रत्यक्ष चिकित्सा देखभाल प्रदान करना, मरीजों की स्थिति की निगरानी करना, दवाएं देना और डॉक्टरों के साथ मिलकर उपचार योजना लागू करना है. वे वार्ड प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का पालन और मरीजों के रिकॉर्ड को सटीक रखने के लिए जिम्मेदार होते हैं. डॉक्टर के निर्देश का पालन करते हुए मरीज का इलाज करना है. कहते हैं सीएस जिले में सीमित संसाधनों एवं मानव बल की काफी कमी है. ऐसे में सीमित संसाधनों में ही काम चलाया जा रहा है. मानवबल की कमी है. जिले में आवश्यक कमियों को दूर करने के लिए विभाग को समय-समय पर पत्राचार किया गया है. मानवबल मिलने के बाद संख्या में वृद्धि की जायेगी. डॉ शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती, सीएस
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