वैज्ञानिक पद्धति की खेती सुरक्षित, टिकाऊ के साथ बेहतर उत्पादन का जरिया है : बीएओ

वैज्ञानिक पद्धतियों से न केवल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, बल्कि खेती को टिकाऊ और सुरक्षित भी बनाया जा सकता है.

चौसा. प्रखंड कृषि कार्यालय परिसर में गुरुवार को गुड गवर्नेंस डे के अवसर पर जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान एवं जय अनुसंधान विषय पर संगोष्ठी का आयोजन प्रखंड कृषि पदाधिकारी राकेश की अध्यक्षता और प्रमोद कुमार सिंह के संचालन में आयोजित की गयी. किसानों को वैज्ञानिक और अनुसंधान आधारित खेती से जोड़ने को लेकर आयोजित उक्त संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, बढ़ती लागत और घटते संसाधनों के बीच खेती को लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाना जरूरी हो गया है. वैज्ञानिक पद्धतियों से न केवल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, बल्कि खेती को टिकाऊ और सुरक्षित भी बनाया जा सकता है. संगोष्ठी में विशेष रूप से रबी सीजन को लेकर चर्चा करते हुए प्रखण्ड कृषि पदाधिकारी ने किसानों को समय पर बोआई, उन्नत किस्म के बीजों के चयन, मिट्टी जांच के अनुसार उर्वरक प्रयोग, सिंचाई प्रबंधन तथा कीट-रोग नियंत्रण की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी देते हुए बताया कि अनुसंधान आधारित खेती से उत्पादन लागत में कमी आती है और बेहतर गुणवत्ता की फसल प्राप्त होती है, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि संभव है. कार्यक्रम के दौरान किसानों ने खेती से जुड़ी अपनी व्यावहारिक समस्याएं और अनुभव साझा किए. कृषि पदाधिकारियों ने उनका समाधान करते हुए सरकारी योजनाओं, अनुदान, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीकी सहायता की विस्तृत जानकारी दी. किसानों को विभाग से निरंतर संपर्क बनाये रखने और सलाह के अनुसार खेती करने की अपील की गयी. कार्यक्रम के अंत में सभी ने वैज्ञानिक सोच के साथ खेती अपनाने और कृषि विकास में योगदान देने का संकल्प लिया. संगोष्ठी में बीटीएम अमृता कुमारी, एटीएम जितेंद्र कुमार मौर्य, प्रमोद कुमार सहित कृषि विभाग के अन्य पदाधिकारी समेत किसान सलाहकार एवं स्थानीय किसान भी उपस्थित रहे.

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By AMLESH PRASAD

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