डुमरांव. कोरानसराय थाना परिसर में सोमवार को आयोजित पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य के जनता दरबार में फरियादियों की पीड़ा खुलकर सामने आयी. सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे. किसी की जमीन पर जबरन कब्जा किया जा रहा था तो कोई वर्षों से पुलिस कार्रवाई की आस लगाए बैठा था. जमीन विवाद, अतिक्रमण, मारपीट, पुलिस पर लापरवाही के आरोप और पारिवारिक कलह जैसे कई संवेदनशील मामलों ने जनता दरबार को गंभीर बना दिया. जनता दरबार की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि एसपी ने हर फरियादी की बात को धैर्यपूर्वक सुना और मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए. उन्होंने दो टूक कहा कि अगर जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो किसी भी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. रास्ता बंद कर परेशान की जा रही महिला की गुहार : दरबार में स्थानीय महिला गायत्री देवी ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि कुछ लोगों ने मिट्टी डालकर उनका रास्ता बंद कर दिया है, जिससे उनका रोजमर्रा का आवागमन मुश्किल हो गया है. उन्होंने बताया कि कई बार थाना और अन्य कार्यालयों में शिकायत करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है. एसपी ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल स्थल जांच कराने और सत्य पाए जाने पर दोषियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया. रैयती जमीन पर कब्जे का आरोप, थानाध्यक्ष पर भी सवाल : जनता दरबार में रविन्द्र मिश्रा का मामला भी चर्चा का विषय बना. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी रैयती जमीन पर जबरन दखल किया जा रहा है. रविन्द्र मिश्रा के अनुसार उनके पास कुल 96 डिसमिल जमीन है, जिसमें एक हिस्से की उन्होंने विधिवत घेराबंदी भी कर रखी है. इसके बावजूद कुछ नामजद लोग कभी गोबर रखकर तो कभी अस्थायी निर्माण कर उनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए जब वे आवाज उठाते हैं तो उल्टे उनके खिलाफ ही धारा 107 और 144 लगा दी जाती है. यहां तक कि थानाध्यक्ष द्वारा उन्हें केस में फंसाने की धमकी दिए जाने की बात भी उन्होंने एसपी के सामने रखी. इस पर एसपी शुभम आर्य ने अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष को संयुक्त रूप से जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच करने का निर्देश दिया और स्पष्ट कहा कि यदि जमीन उनके स्वामित्व की पाई जाती है तो अवैध कब्जा करने वालों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए. मारपीट के मामले में निष्पक्ष जांच का भरोसा : जनता दरबार में एक गंभीर मारपीट का मामला भी उठा, जिसमें पीड़िता बालकेश्वरी देवी और उनके पुत्र, जो पुलिस विभाग में एएसआई हैं, ने आरोप लगाया कि जमीनी विवाद को लेकर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और जान से मारने की कोशिश हुई. दोनों ने हाथ टूटने तक की बात कही. पीड़ित पक्ष का आरोप था कि पुलिस ने इस मामले को हल्का कर दिया और गंभीर धाराएं हटा दी गयी. थानाध्यक्ष की ओर से पक्ष रखते हुए बताया गया कि एफआईआर जिन धाराओं में दर्ज हुई थी, उसी में चार्जशीट दाखिल की गई है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद एसपी ने पूरे मामले की पुनः जांच के निर्देश दिए और पीड़ित से इंजुरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में लापरवाही या गलत मंशा सामने आती है तो सख्त कार्रवाई की जायेगी. पति-पत्नी के बीच दीवार बना ससुराल पक्ष : जनता दरबार में पारिवारिक विवाद का मामला भी सामने आया. मुंगांव निवासी रोहन कुमार ने आरोप लगाया कि उनके ससुर उन्हें अपनी पत्नी से मिलने नहीं दे रहे है. उन्होंने बताया कि प्रेम विवाह के बाद दोनों परिवारों की सहमति से सामाजिक तरीके से दोबारा शादी भी हुई थी और उनका एक बेटा भी है. इसके बावजूद ससुराल पक्ष उन्हें प्रताड़ित कर रहा है और थाने में पकड़वा देता है. इस मामले में भी एसपी ने जांच कर पारिवारिक स्तर पर समाधान निकालने का भरोसा दिलाया. एसपी का स्पष्ट संदेश अन्याय बर्दाश्त नहीं : जनता दरबार के अंत में पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी फरियादी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जायेगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता की शिकायतों को हल्के में न लें और निष्पक्ष, पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करे. जनता दरबार से निकलते समय कई फरियादियों के चेहरे पर उम्मीद की झलक साफ दिखाई दे रही थी.
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