बक्सर में नहीं पहुंचा नाइट्रोफ्यूरान जांच का आदेश, धड़ल्ले से हो रहा अंडों का कारोबार

अंडों में नाइट्रोफ्यूरान नाम के प्रतिबंधित एंटीबायोटिक के अवशेष मिलने की खबर के बाद भी जिले में मुर्गी व अंडे का कारोबार बिना किसी जांच व रोक टोक के जारी है.

ब्रह्मपुर. अंडों में नाइट्रोफ्यूरान नाम के प्रतिबंधित एंटीबायोटिक के अवशेष मिलने की खबर के बाद भी जिले में मुर्गी व अंडे का कारोबार बिना किसी जांच व रोक टोक के जारी है. ठंड के कारण बाजारों में अंडे की मांग बढ़ गयी है. नाइट्रोफ्यूरान एक एंटीबायोटिक है जिसका इस्तेमाल मुर्गियों और अन्य खाद्य जानवरों में प्रतिबंधित है, क्योंकि इसके अवशेष अंडों और मांस में रह सकते हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं. जबकि ब्रांडेड और अनब्रांडेड दोनों तरह के अंडों के सैंपल इकट्ठा करने का निर्देश केंद्र सरकार द्वारा दिया गया है. जिला पशुपालन पदाधिकारी रामसेवक साह ने कहा कि इस तरह को कोई आदेश अथवा निर्देश अब तक नहीं मिले है. फिर भी स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से जिला पशुपालन विभाग ने एहतियात के तौर पर जांच करने की बात कही है. भारत की आफिसियल फूड रेगूरेट्रीबाडी यानी फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड आथोरिटी आफ इंडिया के मुताबिक इस केमिकल की थोड़ी सी भी मात्रा की अनुमति नहीं है. मुर्गियां बीमार न हों, अंडों व चिकन का बढ़िया उत्पादन हो इसके लिए मुर्गी फार्म वाले इसका इस्तेमाल करते हैं. विभागीय अधिकारी का दावा है कि इस तरह की जांच होती है. जिले में अब तक इस तरह की शिकायत नहीं मिली है.

रसायनों को लेकर क्या प्रावधान हैं : भारत इस रसायन के इस्तेमाल पर स्थिति थोड़ी जटिल और विरोधाभासी है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने भी नाइट्रोफ्यूरान और उसके मेटाबोलाइट्स को प्रतिबंधित पदार्थों की सूची में रखा है. 2011 के नियमों और 2018 के संशोधन के तहत, मांस और अंडों के उत्पादन के किसी भी चरण में इसका उपयोग अवैध है. यहीं पर कहानी में मोड़ आता है. इसका उपयोग प्रतिबंधित है, लेकिन एफएसएआइ ने जांच के लिए एक सीमा तय की है. 2018 की अधिसूचना में, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने कई एंटीबायोटिक्स के लिए 0.001 mg/kg (यानी 1.0 µg/kg) की सहनशीलता सीमा निर्धारित की है.

क्या है एफएसएसएआइ : भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है, जो खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात के लिए विज्ञान-आधारित मानक तय करता है, ताकि नागरिकों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके और खाद्य मिलावट व संदूषण से बचाया जा सके, जिसके लिए यह लाइसेंसिंग और विनियमन व भोजन के लिए सुरक्षा और गुणवत्ता के मानक बनाना और लागू करने सहित काम करता है. यह सुनिश्चित करता है कि भारत में बिकने वाला हर खाद्य उत्पाद सुरक्षित हो, उसमें मिलावट न हो और वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक न हो, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास बना रहता है.

क्या कहते हैं अधिकारी

जिले में इस तरह के आदेश का कोई भी पत्र नहीं आया है. फिर भी सुरक्षा मानकों का ध्यान में रखते जांच होती रहती है.

रामसेकव साह, जिला पशुपालन पदाधिकारी, बक्सर

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Published by: Amlesh prasad

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