डुमरांव. गुरुवार को इलाके के विभिन्न क्षेत्रों में मां सरस्वती की पूजा को लेकर काफी चहल-पहल बाजारों में देखी गयी. प्रखंड के विभिन्न गांवों में जगह जगह बच्चों व युवाओं ने व विभिन्न पूजा समितियों के सदस्य देर रात तक पंडालों के सजावट में जुटे रहे, लोगों ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं व महिलाओं ने देर शाम तक पूजा सामग्री की खरीदारी की. पूजा समिति के पंडालों में भक्ति गीत बजने लगे हैं. जिससे पूरे इलाके में भक्तिमय वातावरण बन गया है. वसंत पंचमी के आगमन को लेकर प्रखंड के मठिला, कोरानसराय, अमसारी, नंदन, नया भोजपुर, पुराना भोजपुर सहित अन्य क्षेत्रों में विभिन्न पूजा समितियों के द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा रखकर आज भक्तिभाव से पूजा अर्चना की जायेगी. जब कि क्षेत्र के विभिन्न पूजा समिति के सदस्यों व ग्रामीण इलाके के छात्र छात्राओं ने मां सरस्वती के पट खुलने का इंतजार कर रहे हैं जहां विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा रख पूजा की तैयारी पूरी कर ली है. उत्तर दिशा में मूर्ति स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा का आगमन : इस संबंध में जानकारी देते हुए पंडित कमलेश पाठक, चौगाईं ने बताया कि भारतीय पंचांग के अनुसार, हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी तिथि के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इसी दिन वसंत ऋतु का आगमन होता है. इसे प्रथम वसंतोत्सव भी कहा जाता है. इस पर्व को श्री पंचमी भी कहा जाता है. यह दिन ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है. मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इसे मां सरस्वती का जन्मोत्सव भी कहा जाता है. बसंत पंचमी का पर्व न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी विशेष महत्व रखता है. शास्त्रों के अनुसार वसंत पंचमी के दिन ही देवाधिदेव महादेव का तिलकोत्सव का विधान हुआ था. मान्यता है कि माता पार्वती से विवाह करने से पहले इसी दिन उनका वरण हुआ था, माघ मास की पंचमी तिथि के दिन ही देवताओं द्वारा महादेव का तिलक किया गया था, इसके बाद महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. वास्तु शास्त्र के अनुसार, मां सरस्वती की मूर्ति को स्थापित करने के लिए पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है. इस दिशा में सरस्वती की मूर्ति को स्थापित कर पूजा करने से साधक को ज्ञान की प्राप्ति होती है और मां सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है. इसके अलावा उत्तर पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में मां सरस्वती की मूर्ति को स्थापित करने से धन में वृद्धि होती है और करियर में सफलता के मार्ग खुलते हैं. सुख-समृद्धि में वृद्धि के लिए मां सरस्वती की मूर्ति को उत्तर दिशा में स्थापित कर सकते हैं. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है और करियर और नौकरी में सफलता मिलती है. पूजा सामग्री : गंगाजल,कलश, आम्रपल्लव, जौ की बाली, सिंदूर, रोली, कुमकुम, अबरख, अबीर गुलाल, पंचामृत, रुई, घी, कपूर, मौली, गुड़, सफेद या पीला फूल, पीला अक्षत, पान, सुपारी पंचमेवा, ऋतुफल, हवन सामग्री, नारियल वहीं विशेष प्रसाद भोग में दही, चूड़ा, शक्कर का भोग लगाया जा सकता है. पट खुलने का समय : सूर्योदय उपरांत सुबह 6:40 बजे से लेकर 10: 43 बजे तक पूर्वाह्न दिन में. 10:44 से 12:04 तक राहु काल भी है. अतः राहुकाल में शुभ कार्य वर्जित है. राहुकाल के बाद 12:05 से 2:27 अपराह्न दिन तक पूजा कर सकते हैं.
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