ब्रह्मपुर. चौरास्ता से लेकर रघुनाथपुर मार्ग पर सोमवार को बालू लदे ट्रकों के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई कि आम जनता का पैदल चलना भी दूभर हो गया. ब्रह्मपुर चौरास्ता से लेकर छह किलोमीटर दूर पोखरहां गांव तक ट्रकों की जो कतार सुबह लगी, वह शाम ढलने तक बनी रही. करीब 11 घंटों के इस महाजाम ने न केवल परिवहन व्यवस्था को ध्वस्त किया, बल्कि प्रशासन के दावों की भी पोल खोल दी. स्थानीय लोगों के अनुसार, जाम का सिलसिला सुबह 5 बजे ही शुरू हो गया था. बालू लदे ट्रक सड़क के दोनों ओर बेतरतीब ढंग से खड़े हो गये थे. सुबह 8 बजते-बजते जाम का दायरा बढ़कर 6 किलोमीटर तक पहुंच गया और रघुनाथपुर की ओर जाने वाली सड़क पूरी तरह पार्किंग जोन में तब्दील हो गयी. मरीजों के लिए काल बना जाम : एंबुलेंस भी बेबस इस जाम की सबसे भयावह तस्वीर तब देखने को मिली जब गंभीर मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस जाम के बीचों-बीच फंस गयी. सायरन बजते रहे, लेकिन ट्रकों की लंबी कतारों के बीच उन्हें रास्ता देने के लिए एक इंच जगह भी नहीं बची थी. परिजनों को भारी मशक्कत करनी पड़ी और घंटों की देरी के बाद छोटी गलियों के सहारे किसी तरह एंबुलेंस को निकाला गया. आम जनजीवन और यात्रियों की फजीहत : जाम के कारण यातायात व्यवस्था का यह हाल था कि छोटे वाहन और दोपहिया कार और बाइक सवार सड़क किनारे की कच्ची पगडंडियों और संकरी जगहों से निकलने की कोशिश में दुर्घटना का शिकार होते-होते बचे. स्कूल जाने वाले बच्चों और दफ्तर जाने वाले लोगों को मजबूरन अपनी गाड़ियां छोड़कर पैदल निकलना पड़ा. ब्रह्मपुर और आसपास के बाजारों में सामान लाने वाली गाड़ियां फंसी रहीं, जिससे स्थानीय व्यापार भी प्रभावित हुआ. दिन भर की अफरा-तफरी के बाद, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम दोपहर बाद हरकत में आयी. पुलिसकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद एक-एक करके ट्रकों को किनारे लगवाया और जाम खुलवाना शुरू किया. शाम 4 बजे के आसपास वाहनों का चक्का फिर से घूमना शुरू हुआ, तब जाकर स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली. क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि बालू माफियाओं और ट्रक चालकों की मनमानी के कारण यह सड़क अब मौत का गलियारा बनती जा रही है. रात भर ट्रकों की अनियंत्रित आवाजाही और सुबह सड़क पर उनके जमावड़े से हर दिन जाम की स्थिति बनी रहती है, लेकिन प्रशासन इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल पा रहा है.
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