buxar news : अहिल्या धाम में भजन-कीर्तन कर श्रद्धालुओं ने बितायी रात

buxar news : पांच दिवसीय पंचकोसी परिक्रमा शुरू, रामरेखाघाट से रवाना हुआ साधु-संतों का जत्था

बक्सर. सिद्धाश्रम (बक्सर) पंचकोसी परिक्रमा मेला का शुभारंभ रविवार को हुआ. पांच दिवसीय मेला के पहले दिन पंचकोसी का पड़ाव अहिल्या स्थान अहिरौली में रहा.

वहां गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु देवी अहिल्या का दर्शन-पूजन किये और साधु-संतों के सान्निध्य में पुआ-पकवान का प्रसाद ग्रहण कर रात्रि विश्राम किये. पंचकोसी परिक्रमा समिति के तत्वावधान में अहले सुबह नगर के रामरेखाघाट पर गंगा पूजन व आरती की गयी. इसके बाद महर्षि विश्वामित्र व प्रभु श्रीराम के जयघोष के साथ साधु-संतों का जत्था अहिरौली के लिए रवाना हुआ. वहां पहुंचने पर अहिरौली मठ के उत्तराधिकारी श्री अधुसूदनाचार्य जी महाराज की मौजूदगी में धर्माचार्यों को पुष्प माला व तिलक लगकर स्वागत किया गया. मठिया स्थित भगवान बरदराज का दर्शन कर साधु-संत मंदिर जाकर देवी अहिल्या का पूजन किये. पंचकोसी परिक्रमा मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्णपक्ष पंचमी तिथि से प्रारंभ होकर दशमी को संपन्न होती है. पांच दिनों की इस परिक्रमा में प्रत्येक विश्राम स्थल पर अलग-अलग व्यंजन का भोग लगता है और उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण कर श्रद्धालु रात्रि विश्राम करते हैं. मौके पर पंचकोसी परिक्रमा समिति के सचिव डॉ रामनाथ ओझा, संयुक्त सचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता सुबेदार पांडेय तथा सुदर्शनाचार्य उर्फ भोला बाबा आदि मौजूद थे.

त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम ने की थी परिक्रमा

अहिरौली मठिया परिसर में कथा-प्रवचन का आयोजन किया गया, जिसमें धर्माचार्यों द्वारा पंचकोसी परिक्रमा के पौराणिक महत्व का जिक्र किया गया और इसके पांच दिवसीय अनुष्ठान की शास्त्रीय विधि-विधान बतायी गयी. संत श्री गंगा पुत्र लक्ष्मीनारायण महाराज ने कहा कि त्रेता युग में बक्सर पहुंचे प्रभु श्रीराम ने ताड़का व सुबाहु आदि राक्षसों का वध कर उनका उद्धार किया. फिर महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के पश्चात अनुज लक्ष्मण के साथ प्रभु श्रीराम ने आशीर्वाद के लिए ऋषि आश्रमों की परिक्रमा की थी. उसी के उपलक्ष्य में पंचकोसी परिक्रमा का आयोजन होता है. पंचकोसी के दौरान जिन ऋषि द्वारा जिस व्यंजन का प्रसाद प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण को खिलाया गया था, उसी को पकाकर भोग लगाने तथा खाने का विधान है.

उद्धार के बाद अहिल्या को मिला सप्तर्षि लोक

पंचकोसी परिक्रमा के संबंध में आचार्य कृष्णानंद जी पौराणिक ने अहिल्या उद्धार का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी ब्राह्मण द्वारा अभिशप्त पत्थर की स्त्री को किसी राज कुमार के चरण की धूल से सजीव स्त्री बनकर अपने पति के साथ सप्तर्षि लोक में स्थान प्राप्त करने की यह पहली घटना है. इस संबंध में विद्वानों ने अलग-अलग कारण बताये हैं. उन्होंने कहा कि यद्यपि कि प्रभु श्रीराम अयोध्या के राज कुमार हैं, किंतु वे भगवान विष्णु के साक्षात अवतार हैं. उनके चरण पापापहारी हैं. क्योंकि वे पतित पावन एवं उनके चरण गंगा के उद्गम स्थल भी हैं. कुछ विद्वानों का मत है कि ब्रह्मर्षि गौतम के ब्रह्म वाक्य आशीर्वाद के फलस्वरूप अहिल्या का उद्धार हुआ. वहीं कतिपय शास्त्रकारों द्वारा सिद्धाश्रम की पवित्र धूल के प्रभाव का परिणाम बताया गया है. कहीं महर्षि विश्वामित्र के तप के प्रभाव एवं उनके शिव संकल्प तो अहल्या का करोड़ों वर्षों के तप के कारण राम की कृपा का उल्लेख किया गया है.

आज नारद आश्रम नदांव पहुंचेगा जत्था, खिचड़ी का बनेगा प्रसाद

पंचकोशी परिक्रमा का जत्था सोमवार को नदांव पहुंचेगा. वहां श्रद्धालु नारदेशर सरोवर में स्नान कर मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे. इसके बाद खिचड़ी का प्रसाद पकाकर भगवान को भोग लगायेंगे और प्रसाद ग्रहण करने के बाद भजन- कीर्तन करते हुए रात्रि विश्रम करेंगे. मान्यता के अनुसार नदांव में देवर्षि नारद जी का आश्रम था. त्रेता युग में महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ को सफलता पूर्वक संपन्न कराने के उपरांत प्रभु श्रीराम अनुज लक्ष्मण के साथ नजदीक में आश्रम बनाकर जप-तप करने वाले पांच ऋषियों से उनका कुशल जानने व उनसे आशीर्वाद के लिए पहुंचे थे.

मन्नत पूरी होने पर आंचल पर लौंडा नाच कराती हैं महिलाएं

पंचकोसी परिक्रमा के पहले पड़ाव स्थल अहिल्या मंदिर परिसर में महिलाओं द्वारा अपने आंचल पर लौंडा नाच कराने की होड़ लगी थी. वे लौंडा को अपने आंचल पर नाच करा रही थीं. बदले में दक्षिणा लेकर हुड़ुका के थाप पर बच्चों को गोद में लेकर लौंडा नाच रहे थे. मान्यता के अनुसार बांझ अथवा संतान हीन महिलाएं पुत्र संतान होने पर देवी अहिल्या के दरबार में लौंडा नाच कराने की मन्नत मानती हैं और उनकी इच्छा पूर्ण होने पर लौंडा नचाकर मन्नतें पूरी करती हैं. भोजपुर के बिहिया से पहुंची भागमनी देवी ने कहा कि विवाह के कई सालों तक उन्हें कोई संतान नहीं हुआ था. इसके बाद वह माता अहिल्या के दरबार में पहुंचकर उनसे गुहार लगायी थी. इसके बाद उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई है. माता अहिल्या द्वारा उनकी मन्नत पूरी करने पर वह अपने आंचल पर लौंडा नाच कराने के लिए पहुंची हैं.

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Published by: Shailesh kumar

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