ब्रह्मपुर. बिहार यूपी की सीमा से लगे गंगा नदी के किनारे बसे ब्रह्मपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव को लेकर सरगर्मी अब पूरे चरम पर है. महागठबंधन एनडीए के साथ-साथ जनसुराज तथा बसपा के संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं का दौर भी चल रहा है. लेकिन इस बार राजद के समक्ष जीत की हैट्रिक लगाने की कड़ी चुनौती सामने खड़ी है. 1995 से सिर्फ एक बार 2010 को छोड़कर इस क्षेत्र से लगातार राजद प्रत्याशी की ही जीत होती रही है. 2010 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में दिलमणीं देवी इस क्षेत्र से विजयी हुई थी. लेकिन 2015 तथा 2020 के चुनाव में राजद प्रत्याशी के रूप में शंभू नाथ यादव जीतते आ रहे हैं. पिछले 2025 के चुनाव में उन्होंने लोजपा प्रत्याशी हुलास पांडे को हराया था. तब एनडीए प्रत्याशी तीसरे स्थान पर चले गये थे. विधानसभा का यह सीट इस बार एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए काफी हॉट बन गयी है. एक ओर ब्रह्मपुर सीट पर राजद हैट्रिक लगाने को तैयार है. वहीं, एनडीए भी हैट्रिक को तोड़ने के लिए जी जान से लगा हुआ है. लेकिन यह काफी हद तक प्रत्याशी पर निर्भर करेगा जो उसके लिए काफी चुनौती भरा काम होगा. इस सीट पर पहला चुनाव वर्ष 1952 में हुआ था. प्रारंभ के दो चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में ललन सिंह को जीत मिली थी. इसके बाद 1972, 1980 तथा 1985 में इस क्षेत्र से पंडित ऋषिकेश तिवारी कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते सत्येंद्र नारायण सिन्हा के मंत्रिमंडल में वह कैबिनेट मंत्री भी बने थे. 1977 के जनता पार्टी के लहर में रमाकांत ठाकुर को जीत मिली थी. डॉ स्वामीनाथ तिवारी भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीते. 1995 से 2005 में हुए दोनों चुनाव तक लगातार राजद प्रत्याशी के रूप में अजीत चौधरी जीतते रहे. इससे पहले इस क्षेत्र से तीन बार निर्दलीय प्रत्याशियों को भी जीत मिली थी 1962 में बुद्धिराम सिंह जीते थे तथा 1967 व 1969 में पंडित सूर्य नारायण शर्मा को जीत मिली थी. अभी तक इस क्षेत्र में 17 बार विधानसभा का चुनाव हो चुका है. 1985 के बाद से इस क्षेत्र से कांग्रेस को जीत नहीं मिल सकी है 1990 में ऋषिकेश तिवारी का स्वाध्यक्ष स्वामीनाथ तिवारी के साथ सीधा मुकाबला हुआ था. उसके बाद से इस क्षेत्र से भाजपा और राजद के बीच ही टक्कर होती आ रही है. अभी सभी का ध्यान प्रत्याशियों के नाम को लेकर है. राजद की ओर से शंभू नाथ यादव का फिर से टिकट मिलना लगभग तय माना जा रहा है. लेकिन विरोधी उनकी कमजोरी को उजागर कर बदलाव के लिए जी तोड़ प्रयास भी करते देखे जा रहे हैं. वहीं एनडीए प्रत्याशी को लेकर अभी भी संसय की स्थिति बनी हुई है इस सीट को लेकर लोजपा तथा भाजपा के बीच कड़ी रस्साकस्सी चल रही है. एनडीए के किस कोटे में यह सीट जाएगी या अभी तय नहीं हो सका है केवल इसको लेकर अभी रोजाना अटकलों का ही दौर चल रहा है. वैसे जानकार बताते हैं कि इस बार रजत को हैट्रिक लगाने के लिए कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा.
बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर के रूप में ब्रह्मपुर की रही है पहचान : विधानसभा मुख्यालय ब्रह्मपुर में बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ का एक अति प्राचीन मंदिर है. ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना भगवान ब्रह्मा ने स्वयं अपने हाथों की थी. इसलिए इसे मनोकामना लिंग के रूप में भी जाना जाता है. यहां सालों भर दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन पूजन के लिए आते हैं. पूरे सावन माह में तो इनकी संख्या लाखों में पहुंच जाती है. इसके अलावा फाल्गुन माह में महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां पशुओं का बड़ा मेला भी लगता है.
विधानसभा का इतिहासइस सीट पर लंबे समय से आरजेडी का दबदबा रहा है. बीच में एक बार बीजेपी भी जीती है लेकिन उसके लिए यहां कब्जा जमाना मुश्किल राह है.
1952 ललन प्रसाद सिंह (कांग्रेस)
1957 ललन प्रसाद सिंह (कांग्रेस)
1962 बुधी नाथ सिंह (निर्दलीय)
1967 सूर्यनारायण शर्मा (निर्दलीय)
1969 सूर्यनारायण शर्मा (लोक तांत्रिक कांग्रेस)
1972 ऋषि केश तिवारी (कांग्रेस)
1977 रामकांत ठाकुर (जनता पार्टी)
1980 ऋषि केश तिवारी (कांग्रेस)
1985 ऋषि केश तिवारी (कांग्रेस)
1990 स्वामी नाथ तिवारी (बीजेपी)
1995 अजीत चौधरी (जनता दल)
2000 अजीत चौधरी (आरजेडी)
2005 अजीत चौधरी (आरजेडी)
2010 दिलमर्णी देवी (बीजेपी)
2015 शंभूनाथ यादव (आरजेडी)
2020 शंभूनाथ यादव (आरजेडी
ब्रह्मपुर विधानसभा सभा में वोटरों की संख्या
199-ब्रह्मपुर विधान सभा
पुरुष मतदाता 177987
महिला मतदाता 158482
तृतीय लिंग 02
कुल मतदाता 336471
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