Buxar News : सनातन धर्म में आस्था के प्रमुख केंद्र और महर्षि विश्वामित्र की पावन नगरी बक्सर में पितृ पक्ष यानी श्राद्ध महालय की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गयी हैं. वाराणसी पंचांग और स्थानीय आचार्यों के अनुसार, इस वर्ष पितृ पक्ष 26 सितंबर शनिवार से शुरू होगा और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा.
26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध और ऋषि तर्पण
आचार्य कृष्णानंद जी पौराणिक ने बताया कि 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा का श्राद्ध और ऋषि तर्पण किया जायेगा. वहीं, मुख्य प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध 27 सितंबर से शुरू होगा. पितृ पक्ष के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए बक्सर पहुंचेंगे.
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प्रमुख घाटों पर प्रशासनिक तैयारियां तेज
बक्सर में गंगा नदी उत्तरवाहिनी होने के कारण इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है. पितृ पक्ष के दौरान ऐतिहासिक रामरेखा घाट, नाथ बाबा घाट और सती घाट पर तर्पण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. इसे देखते हुए जिला प्रशासन और नगर परिषद की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा, घाटों पर बैरिकेडिंग, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था को लेकर तैयारियां की जा रही हैं.
कुतप काल में तर्पण का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य पं. रमेश चौबे उर्फ मुन्ना बाबा के अनुसार, श्राद्ध कर्म और तर्पण के लिए कुतप काल को विशेष महत्व दिया गया है. उन्होंने बताया कि कुतप काल दोपहर 11:36 बजे से 12:27 बजे के बीच होता है. इस दौरान काले तिल, जौ, कुशा और गंगाजल के साथ दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का आह्वान किया जाता है.
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रामरेखा घाट और बक्सर का धार्मिक महत्व
रामरेखा घाट के पंडा अमरनाथ पांडेय उर्फ लाला बाब ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार बक्सर में महर्षि विश्वामित्र का आश्रम था और रामरेखा घाट पर भगवान श्रीराम के चरण पड़े थे. इसी धार्मिक मान्यता के कारण इस सिद्ध भूमि पर गंगाजल से पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व माना जाता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां किया गया पिंडदान सात पीढ़ियों के उद्धार का माध्यम माना जाता है.
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