डुमरांव. नव वर्ष के स्वागत को लेकर डुमरांव शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक उत्साह और उमंग का माहौल देखने को मिला. जैसे ही घड़ी की सुई रात के 12 बजे पर पहुंची, शहर और गांवों में पटाखों की गूंज सुनाई देने लगी. हर ओर ‘बाय-बाय 2025’ और ‘हैप्पी न्यू ईयर 2026’ की आवाजें गूंज उठीं. मोबाइल फोन भी एक साथ बजने लगे और लोग एक-दूसरे को नव वर्ष की शुभकामनाएं देने में जुट गए. शाम ढलते ही बाजारों में रौनक बढ़ गयी. केक, मिठाई के साथ-साथ लिट्टी-चोखा के लिए सत्तू, लहसुन, प्याज, धनिया, आलू, बैंगन आदि की जमकर खरीदारी हुई. ग्रामीण इलाकों में युवाओं ने सामूहिक रूप से लिट्टी-चोखा भोज का आयोजन किया, जबकि शहरी क्षेत्रों में होटल और रेस्टोरेंट में केक काटे गए और रंगारंग कार्यक्रम आयोजित हुए. सोशल मीडिया पर बधाइयों का लगा तांता : नये साल के आगमन के साथ ही व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शुभकामनाओं का सिलसिला तेज हो गया. युवाओं ने एक-दूसरे से गले मिलकर नए साल की बधाई दी. हालांकि सनातन धर्म को मानने वाले एक वर्ग ने इस आयोजन से दूरी बनाये रखी. बाजार रहे गुलजार : नव वर्ष को लेकर बाजार पूरी तरह गुलजार रहे. होटल और रेस्टोरेंट को आकर्षक ढंग से सजाया गया. नव वर्ष की पूर्व संध्या पर कई होटलों में गीत-संगीत के कार्यक्रम भी आयोजित किये गये. केक-मिठाई के साथ सत्तू, सब्जियों और अन्य खाद्य सामग्री की बिक्री में तेजी देखी गयी. मांस-मछली का बाजार भी रहा गर्म : गुरुवार को कई सनातनी मांस-मछली का सेवन नहीं करते हैं. संयोग से इसी दिन नए साल की शुरुआत होने के कारण लोगों ने नव वर्ष की पूर्व संध्या पर ही मांस-मछली का आनंद लिया. इससे मुर्गा और मीट बाजार में भी खासा उछाल देखा गया. हिंदू नव वर्ष मानने वाले रहे दूर : सनातन धर्म के अनुयायियों का एक वर्ग इस नव वर्ष उत्सव से अलग रहा. उनका कहना था कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार नव वर्ष की शुरुआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है. पंडित रवि भूषण ओझा ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए यही दिन सनातन धर्म में नव वर्ष के रूप में मान्य है. आज मंदिरों और पिकनिक स्पॉट पर उमड़ेगी भीड़ : नव वर्ष के अवसर पर गुरुवार को डुमरांव अनुमंडल के प्रसिद्ध मंदिरों और पिकनिक स्थलों पर भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है. जंगल रोड स्थित जंगली महादेव मंदिर, डुमरेजनी माता मंदिर, नगर स्थित बड़ी काली माता मंदिर, शहीद पार्क सहित अन्य दर्शनीय स्थलों पर श्रद्धालुओं और सैलानियों की भीड़ रहेगी. वहीं खेल के मैदानों में युवा वर्ग सामूहिक रूप से लिट्टी-चोखा बनाने की तैयारियों में जुटा हुआ है.
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