MLC By Election: (मृत्युंजय सिंह) बिहार की राजनीति में स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र में एमएलसी का चुनाव हमेशा से ही रसूख और जमीनी पकड़ की परीक्षा माने जाते रहे हैं. भोजपुर-सह-बक्सर सीट पर हो रहे उपचुनाव ने इस बार एक नया रिकॉर्ड बनाया है. चुनावी आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि इस बार बक्सर जिले की महिला मतदाता ही वह ‘एक्स-फैक्टर’ हैं, जो किसी भी प्रत्याशी की नैया पार लगा सकती हैं या डुबो सकती हैं.
चुनाव में ‘महिला फैक्टर’ क्यों है खास?
यह उपचुनाव पूर्व एमएलसी राधा चरण साह के इस्तीफे (संदेश विधानसभा से विधायक बनने के बाद) से खाली हुई सीट को भरने के लिए हो रहा है. इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि बक्सर जिले में महिला जनप्रतिनिधियों (वोटरों) की संख्या पुरुषों से काफी अधिक है.
बक्सर में कितनी है वोटरों की संख्या?
बक्सर में टोटल वोटरों की संख्या 2,303 है. इनमें महिला वोटर 1,223 जबकि पुरुष वोटर 1,080 हैं. आंकड़ों के मुताबिक, बक्सर में महिलाओं की संख्या पुरुषों से 143 अधिक है. इसका सीधा मतलब यह है कि वार्ड सदस्य, मुखिया, बीडीसी और जिला परिषद जैसे पदों पर महिलाओं का दबदबा है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जो उम्मीदवार महिलाओं के मुद्दों और उनके मान-सम्मान को केंद्र में रखकर प्रचार कर रहा है, उसकी बढ़त तय है.
प्रखंडवार जंग कहां कितनी ताकत?
बक्सर जिले के 11 प्रखंडों में चुनाव की बिसात बिछ चुकी है.सिमरी का रण 337 वोटरों के साथ सिमरी जिला का सबसे बड़ा चुनावी केंद्र है. यहाँ की एक-एक सीट पर प्रत्याशियों की पैनी नजर है.राजपुर और ब्रह्मपुर: राजपुर 298 और ब्रह्मपुर 288 में भी बड़ी संख्या में वोटर हैं, जो परिणाम को पलटने की क्षमता रखते हैं.
छोटे प्रखंडों का बड़ा असर
केसठ 54, चककी 64 और चौगाई 77 जैसे छोटे प्रखंड भले ही संख्या में कम हों, लेकिन उपचुनाव की नजदीकी लड़ाई में ये ‘टिपिंग पॉइंट’ साबित हो सकते हैं. इस उपचुनाव में प्रत्याशियों के लिए चुनौती यह है कि वे भोजपुर (आरा) के साथ-साथ बक्सर के ग्रामीण इलाकों में भी अपनी पकड़ मजबूत करें. भोजपुर में 3,783 वोटर हैं, जहां भी महिला वोटरों (2,031) की संख्या पुरुषों (1,752) से अधिक है.
प्रशासन की तैयारी, सुरक्षा व्यवस्था टाइट
जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम की अध्यक्षता में हुई हालिया बैठकों में साफ निर्देश दिए गए हैं. बक्सर में 11 बूथ बनाए गए हैं, जहां सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों और स्थानीय पुलिस की तैनाती रहेगी. पूरी मतदान प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी. चुनावी खर्च और प्रचार प्रसार पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि धनबल का दुरुपयोग न हो सके.
स्थानीय विश्लेषकों का कहना है कि एमएलसी चुनाव अक्सर व्यक्तिगत संबंधों और स्थानीय समीकरणों पर टिका होता है. यह उपचुनाव आगामी 12 मई को होने जा रहा है, ऐसे में गर्मी के इस मौसम में बक्सर की ‘सियासी तपिश’ भी चरम पर है. महिला प्रतिनिधियों का एक बड़ा वर्ग साइलेंट वोटर की तरह व्यवहार कर रहा है, जो आखिर में चौंकाने वाले परिणाम दे सकता है.
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