चौसा. वीरों की भूमि के रूप में प्रसिद्ध बक्सर जिले में पर्यटन विकास और आदिवासी हितों को लेकर गंभीर पहल की आवश्यकता है. जनजातीय क्षेत्रों के लगातार भ्रमण के दौरान यह सामने आया है कि जिले में कई ऐसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल हैं, जिन्हें संजोने और समुचित रूप से विकसित करने की जरूरत है. यह बातें बुधवार को अनुसूचित जनजाति आयोग के चेयरमैन शैलेंद्र गढ़वाल ने चौसा स्थित ऐतिहासिक शेरशाह शौर्यस्थल के भ्रमण के दौरान कहीं. उन्होंने कहा कि चौसा वह ऐतिहासिक स्थल है, जहां वर्ष 1539 में मुगल शासक हुमायूं और शेरशाह सूरी के बीच ऐतिहासिक युद्ध हुआ था. कर्मनाशा और गंगा नदी के संगम पर स्थित यह स्थल आज भी अपनी पहचान और विकास की प्रतीक्षा कर रहा है. यदि इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाए तो यहां देश-विदेश से पर्यटकों के आने की व्यापक संभावनाएं बन सकती हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे. इस दौरान अनुसूचित जनजातीय आयोग सदस्य राजू खरवार, जदयू जिलाध्यक्ष अशोक सिंह, गोंडवाना सभा के रामजीत गोंड़, रामप्रवेश सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
