बक्सर में श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग पर भावविभोर हुए श्रद्धालु, प्रेमाचार्य पीताम्बर जी महाराज ने दिये संस्कारों के संदेश

बक्सर में श्रीराम कथा के दौरान पीताम्बर जी महाराज ने कहा कि दांपत्य जीवन की पवित्रता और संस्कारों से ही दिव्य संतान का निर्माण होता है।

Buxar News : श्रीरामेश्वरनाथ मंदिर, रामरेखा घाट में चल रही संगीतमय श्रीराम कथा के छठे दिन रविवार को प्रेमाचार्य पीताम्बर जी महाराज ने श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया. विवाह प्रसंग सुनकर कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और भक्ति में झूमते नजर आये. श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर कन्यादान कर धर्मलाभ अर्जित किया.

अच्छे संस्कारों से बनती है दिव्य संतान

प्रेमाचार्य पीताम्बर जी महाराज ने कहा कि दांपत्य जीवन की पवित्रता और संस्कारों से ही दिव्य संतान का निर्माण होता है. परिवार में अच्छे संस्कारों का वातावरण बनाना माता-पिता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि राजा दशरथ के आदेश और गुरुजनों की कृपा से भगवान श्रीराम अल्प समय में ही विद्या और विभिन्न गुणों में पारंगत हो गये.

श्रीराम ने तोड़ा अहंकार रूपी धनुष

सीता स्वयंवर प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अहंकार रूपी धनुष का मर्दन किया और माता सीता ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का वरण कर मर्यादित जीवन को अपनाया. जहां सच्चा स्नेह होता है, वहां मिलन में कोई संदेह नहीं होता.

पुष्प वाटिका में हुआ राम-सीता का प्रथम मिलन

पुष्प वाटिका प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण जब पुष्प लेने जनक की वाटिका पहुंचे, उसी दौरान सीता जी ने श्रीराम को देखा और उन्हें पति रूप में पाने के लिए माता गौरी की पूजा की. इसके बाद धनुष यज्ञ में अनेक महाबली राजा शिव धनुष को उठाने में असफल रहे, लेकिन श्रीराम ने धनुष तोड़कर सीता से विवाह किया.

परशुराम संवाद का हुआ संगीतमय मंचन

कथा के दौरान श्रीराम-सीता विवाह के बाद परशुराम संवाद का संगीतमय प्रस्तुतीकरण किया गया. प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया. कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा.

बच्चों को संस्कार देने की अपील

महाराज ने अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से घर की आरती में शामिल कराने की अपील की. उन्होंने कहा कि धार्मिक वातावरण और अच्छे संस्कारों से बच्चों में भक्ति, अनुशासन और सद्गुण विकसित होते हैं.

उन्होंने कहा कि जहां श्रीराम कथा होती है, वह स्थान दिव्य हो जाता है. कथा श्रवण से दैहिक ताप दूर होते हैं और जीवन में सत्य, धैर्य, मधुरता तथा उदारता का संचार होता है.

मौके पर समाजसेवी हिमांशु चतुर्वेदी, डॉ. प्रभास चतुर्वेदी, नंदकुमार तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. शशांक शेखर उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे. आयोजन में जय भोलेनाथ ग्रुप और पंडा समाज का सक्रिय योगदान रहा.

कथा कहते प्रितांबर जी महाराज | Prabhat Khabar Network


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By मृत्युंजय सिंह

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