अंचल अधिकारी डुमरांव के विरुद्ध शास्ति व अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा

परिवाद का मुख्य विषय भूमि विवाद में उच्च न्यायालय पटना एवं जिला प्रशासन के आदेशों का अनुपालन न होना और इसके कारण संभावित शांति भंग की स्थिति थी.

डुमरांव. भूमि विवाद एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए वरीय पदाधिकारियों और उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है. लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत दायर परिवाद में अंचल अधिकारी, डुमरांव की उदासीनता को गंभीर मानते हुए उनके विरुद्ध शास्ति अधिरोपित करने एवं अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गयी है. यह निर्णय परिवाद संख्या 530110118112510210 (वर्ष 2025) में सुनाया गया.

क्या है पूरा मामला : परिवादी विजय शंकर राय (पिता स्व रामकृपाल राय), ग्राम पोस्ट डुमरांव, प्रखंड डुमरांव, जिला बक्सर द्वारा 18 नवंबर 2025 को परिवाद दायर किया गया था. परिवाद का मुख्य विषय भूमि विवाद में उच्च न्यायालय पटना एवं जिला प्रशासन के आदेशों का अनुपालन न होना और इसके कारण संभावित शांति भंग की स्थिति थी. उच्च न्यायालय पटना द्वारा द्वितीय अपीलवाद संख्या 236/18 में विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित है. इसके बावजूद विवादित भूमि पर धान की फसल लगी पाई गई, जिससे दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प की प्रबल संभावना बनी हुई थी.

पुलिस की सक्रियता, प्रशासन की निष्क्रियता : डुमरांव थाना द्वारा समय-समय पर अंचल अधिकारी को पत्र भेजकर धान की फसल को तत्काल कटवाने एवं जब्त (कुर्क) करने का आग्रह किया गया. थाना द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को भी स्थिति से अवगत कराया गया. अनुमंडल पदाधिकारी पदाधिकारी, डुमरांव ने स्पष्ट आदेश जारी कर अंचल अधिकारी को दंडाधिकारी के रूप में नामित करते हुए फसल कटायी, जब्ती और बिक्री की कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. इसके बावजूद अंचल कार्यालय की ओर से कोई ठोस एवं प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई. अंतरिम और असंतोषजनक प्रतिवेदन लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी कुमारी मनीषा द्वारा अंचल अधिकारी से अनुपालन प्रतिवेदन मांगा गया, लेकिन जो प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, वह अंतरिम और तथ्यात्मक रूप से अपूर्ण पाया गया. सुनवाई की कई तिथियां निर्धारित होने के बावजूद परिवाद के वास्तविक निवारण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.

लापरवाही बर्दाश्त नहीं : लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि अंचल अधिकारी का यह आचरण बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के प्रति स्वेच्छाचारिता एवं घोर उदासीनता को दर्शाता है. इसी आधार पर परिवाद को स्वीकार करते हुए अंचल अधिकारी, डुमरांव के विरुद्ध शास्ति अधिरोपित, अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा के साथ वाद का निष्पादन किया गया.

डीएम को भेजी गई आदेश की प्रति : इस निर्णय की प्रति जिला पदाधिकारी, बक्सर को अग्रसारित कर दी गयी है, जिससे आगे की प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित हो सके. यह मामला प्रशासन के लिए एक सख्त चेतावनी है कि न्यायालय और वरीय अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी अब महंगी पड़ सकती है.

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Published by: Amlesh prasad

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